02/10/2026
जब भारत का शेयर मार्केट अपने चरम पर था, तो वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ललकारते हुए कहा था कि अब भारत को विदेशी निवेशकों (FII) को जरूरत नहीं। अब देश का रिटेल इनवेस्टर कोई भी झटका सह सकता है।
उसके बाद विदेशी निवेशकों ने जो शेयर बेचना शुरू किया कि भारत का मार्केट एकदम से धड़ाम ही हो गया। रिटेल इनवेस्टर्स की हालत तो झटका खाते-खाते दिलवाले के अजय देवगन जैसी हो गई है।
भारत की GDP ग्रोथ लगातार 8% के करीब है। लेकिन विदेशी निवेशक ऐसे भाग रहे हैं, जैसे कि हमारी अर्थव्यवस्था की नाव में सुराख हो और ये एकदम से डूबने की कगार पर है। कोई ऐसा दिन नहीं बीत रहा, जब विदेश निवेशक शेयर न बेच रहे। निफ्टी तो सिर्फ इसी महीने करीब 7% पर्सेंट गिर गया है।
घरेलू म्यूचुअल फंड महंगे भाव पर शेयर खरीदकर विदेशी निवेशकों को भागने का मौका भी दे रहे हैं। उनके पास जनता की SIP का अथाह पैसा है। वो SIP के पैसे को ऐसे उड़ा रहे हैं, जो बिगड़ैल लौंडा आर्केस्ट्रा में नचनिया पर बाप की खून-पसीने की कमाई उड़ाता है।
सरकार भी LTCG जैसा टैक्स लगाकर पैसे बटोर रही है। जबकि ज्यादातर उभरती अर्थव्यवस्थाओं में विदेशी निवेशकों पर ये टैक्स नहीं है। सरकार को लगता है कि जैसे जनता युगांडा जैसी सुविधाओं के लिए अमेरिका के लेवल का टैक्स दे रही है, वैसे विदेशी निवेशक भी दे देंगे।
मतलब न आप AI में आगे हैं, न आपकी कंपनियों की ग्रोथ दमदार है। ऊपर से आपका रुपया रसातल में है। यानी विदेशी निवेशकों को अगर थोड़ा बहुत मुनाफा है, तो वो भी रुपये की कमजोरी और टैक्स के चलते नुकसान में बदल जाएगा।
और ऐसा नहीं है कि भारत का बाजार अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते गिर रहा है। क्योंकि इसी युद्ध के दौरान अमेरिका, दक्षिण कोरिया, ताइवान, चीन और यहां तक के पाकिस्तान के शेयर मार्केट में दमदार रिटर्न दिया है। लेकिन, भारत का मार्केट दो साल में करीब 13% गिरा है। यानी दो साल पहले 1 लाख लगाते, तो आज आपके हाथ में 87 हजार होते।
निर्मला सीतारमण अगले साल यानी 2027 में बतौर वित्त मंत्री अपना 10वां केंद्रीय बजट पेश करेंगी। इसके साथ वो मोरारजी देसाई के सबसे ज्यादा बजट पेश करने का रिकॉर्ड बराबर कर लेंगी। लेकिन इतिहास उन्हें कैसी वित्त मंत्री के रूप में याद करेगा? मुझे लगता है कि ज्यादा लस्सन-प्याज न खाने वाली वित्त मंत्री के रूप में।
वेदव्यास महाभारत में धृतराष्ट्र से कहते हैं कि वृक्ष केवल फल नहीं देते राजन्, वो ईंधन भी देते हैं। ऐसे में जो वृक्ष फल नहीं देते, उनका कट जाना ही उचित है, ताकि उनके रिक्त किए स्थान पर फलदार वृक्ष लग सके।
मुझे लगता है कि निर्मला ताई को भी वित्त मंत्री के पद से 'कट' ही जाना चाहिए, ताकि उनकी जगह कोई ज्यादा लस्सन-प्याज खाने वाला और टैक्स कम करने वाला वित्त मंत्री आ सके। क्योंकि रिटेल इनवेस्टर कोई झटका सहने की स्थिति में नहीं है। वो मुन्नाभाई MBBS का वो सब्जेक्ट बन चुका है, जो कुछ महसूस नहीं कर पा रहा है।