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महत्वपूर्ण सूचनाअब AIS में दिखाई देगी विदेशी आय एवं विदेशी संपत्तियों की जानकारीकरदाता सेवाओं को बेहतर बनाने तथा स्वैच्छ...
10/07/2026

महत्वपूर्ण सूचना

अब AIS में दिखाई देगी विदेशी आय एवं विदेशी संपत्तियों की जानकारी

करदाता सेवाओं को बेहतर बनाने तथा स्वैच्छिक कर अनुपालन (Voluntary Tax Compliance) को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है।

मुख्य बिंदु

अब Automatic Exchange of Information (AEOI) के अंतर्गत भारत को प्राप्त विदेशी आय (Foreign Income) एवं विदेशी संपत्तियों (Foreign Assets) से संबंधित जानकारी पात्र करदाताओं के Annual Information Statement (AIS) में प्रदर्शित की जाएगी।

यह जानकारी आयकर विभाग के e-Filing Portal पर उपलब्ध रहेगी, जिससे करदाता अपनी आयकर विवरणी (ITR) दाखिल करते समय सही एवं पूर्ण जानकारी का मिलान कर सकेंगे।

इस आदेश के अनुसार निम्न अवधि की जानकारी AIS में अपलोड की जाएगी:

01.01.2022 से 31.12.2022

01.01.2023 से 31.12.2023

01.01.2024 से 31.12.2024

01.01.2025 से 31.12.2025

करदाताओं के लिए सलाह

यदि आपके पास विदेश में बैंक खाता, निवेश, संपत्ति या किसी प्रकार की विदेशी आय है, तो ITR दाखिल करने से पहले अपने AIS का अवश्य मिलान करें तथा आवश्यक जानकारी सही रूप से घोषित करें।

स्रोत: CBDT आदेश संख्या F. No. 225/73/2025-ITA-II, दिनांक 09 जुलाई 2026।

09/07/2026
08/07/2026

व्यावसायिक अनुपालन जागरूकता श्रृंखला दिवस 7

क्या आपके व्यवसाय के सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज़ एक ही स्थान पर सुरक्षित हैं?

अनेक व्यवसायी वर्षों तक सफलतापूर्वक व्यवसाय करते हैं, लेकिन जब Loan, Tender, Departmental Verification, Partnership Dispute या अचानक किसी दस्तावेज़ की आवश्यकता पड़ती है, तब पता चलता है कि आवश्यक कागज़ात अधूरे, बिखरे हुए या उपलब्ध ही नहीं हैं।

एक व्यवस्थित व्यवसाय की पहचान केवल अच्छी बिक्री नहीं, बल्कि सुव्यवस्थित दस्तावेज़ प्रबंधन (Document Management) भी है।

प्रत्येक व्यवसायी को इन 5 बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए

1.महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों की सूची तैयार रखें।
GST, PAN, TAN, MSME, IEC, ROC, FSSAI, Shop & Establishment, Rent Agreement, Bank Documents, Insurance एवं अन्य आवश्यक प्रमाणपत्र एक स्थान पर सुरक्षित रखें।

2.सभी दस्तावेज़ों की Digital Copy रखें।
प्रत्येक महत्वपूर्ण दस्तावेज़ को Scan करके सुरक्षित Digital Folder या Cloud Storage में रखें।

3.Renewal एवं Expiry Date पर नज़र रखें।
Licence, Digital Signature (DSC), Insurance, LUT, Professional Membership आदि की समाप्ति तिथि पहले से नोट करें।

4.अधिकृत व्यक्ति निर्धारित करें।
किस दस्तावेज़ की जिम्मेदारी किसके पास है, यह स्पष्ट होना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर समय न लगे।

5.प्रत्येक छह महीने में दस्तावेज़ों की समीक्षा करें।
पुराने, संशोधित या नवीनीकरण योग्य दस्तावेज़ों की नियमित जाँच व्यवसाय को जोखिम से बचाती है।

यह क्यों आवश्यक है?

विभागीय जाँच के समय दस्तावेज़ तुरंत उपलब्ध रहते हैं।

Loan, Tender एवं Audit की प्रक्रिया सरल हो जाती है।

समय, धन एवं अनावश्यक तनाव से बचाव होता है।

व्यवसाय अधिक संगठित एवं विश्वसनीय बनता है।

आज की अनुपालन सलाह

आज ही अपने व्यवसाय के सभी महत्वपूर्ण दस्तावेज़ों की एक Master File तथा एक Digital Backup तैयार करें।

सुव्यवस्थित दस्तावेज़ ही सुरक्षित व्यवसाय की मजबूत नींव हैं।

सिन्हा एंड एसोसिएट्स

(कर सलाहकार)

कर, पेरोल एवं व्यावसायिक अनुपालन में आपका विश्वसनीय सहयोगी

हमारी प्रमुख सेवाएँ
आयकर परामर्श | जीएसटी अनुपालन | टीडीएस अनुपालन | वेतन प्रबंधन | कंपनी अनुपालन | लेखा एवं वित्तीय परामर्श

मोबाइल: +91 9953963458 | +91 8527069878
ई-मेल: [email protected]

*आज का विचार*
"सफल व्यवसाय केवल कमाई से नहीं, बल्कि व्यवस्थित दस्तावेज़ों और अनुशासित प्रबंधन से भी पहचाना जाता है।"

07/07/2026

व्यावसायिक अनुपालन जागरूकता श्रृंखला–दिवस 6
यदि विभाग से Notice आ जाए, तो सबसे पहले क्या करें?

बहुत से व्यवसायी Income Tax या GST का Notice आते ही घबरा जाते हैं।
लेकिन याद रखें

हर Notice का अर्थ यह नहीं होता कि आपने कोई गलती की है।
कई Notice केवल जानकारी (Information), दस्तावेज़ (Documents) या स्पष्टीकरण (Clarification) के लिए भी जारी किए जाते हैं।

प्रत्येक व्यवसायी को ये 5 बातें अवश्य ध्यान रखनी चाहिए

1. Notice को ध्यान से पढ़ें
सबसे पहले देखें कि Notice किस विभाग से आया है, किस धारा (Section) के अंतर्गत जारी हुआ है तथा उत्तर (Reply) देने की अंतिम तिथि क्या है।

2. समय सीमा (Due Date) का पालन करें
Notice का उत्तर निर्धारित समय के भीतर अवश्य दें। देरी होने पर अनावश्यक कानूनी जटिलताएँ उत्पन्न हो सकती हैं।

3. सही एवं पूर्ण दस्तावेज़ तैयार करें
केवल वही जानकारी एवं दस्तावेज़ प्रस्तुत करें जो Notice में मांगे गए हैं। सभी दस्तावेज़ प्रमाण सहित व्यवस्थित रखें।

4. बिना जाँच के उत्तर न दें
जल्दबाज़ी में गलत जानकारी या अधूरे दस्तावेज़ भेजना भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है।

5. विशेषज्ञ की सलाह लें
यदि Notice किसी कानूनी या तकनीकी विषय से संबंधित है, तो उत्तर देने से पहले कर विशेषज्ञ (Tax Consultant) से अवश्य परामर्श करें।

यह क्यों आवश्यक है?

* अनावश्यक Penalty एवं Interest से बचाव होता है।
* विभाग के समक्ष सही एवं समयबद्ध उत्तर प्रस्तुत होता है।
* व्यवसाय की विश्वसनीयता बनी रहती है।
* भविष्य में होने वाली कर संबंधी समस्याओं का जोखिम कम होता है।

आज की अनुपालन सलाह

GST Portal एवं Income Tax Portal पर प्राप्त होने वाले Notices एवं Communications की प्रत्येक सप्ताह कम-से-कम एक बार अवश्य जाँच करें।
समय पर दिया गया सही उत्तर, बड़ी कानूनी समस्या बनने से पहले ही मामले को समाप्त कर सकता है।

सिन्हा एंड एसोसिएट्स
(कर सलाहकार)
कर, पेरोल एवं व्यावसायिक अनुपालन में आपका विश्वसनीय सहयोगी

हमारी प्रमुख सेवाएँ
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मोबाइल: +91 9953963458 | +91 8527069878
ई-मेल: [email protected]
समय पर दिया गया सही उत्तर, व्यवसाय की सुरक्षा का सबसे प्रभावी उपाय है।"

06/07/2026

ईपीएफ योजना 2026 : वास्तव में क्या बदला है?

सभी ईपीएफ (EPF) सदस्यों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट। पुरानी ईपीएफ योजना, 1952 के स्थान पर अब ईपीएफ योजना, 2026 लागू की गई है। आइए सरल भाषा में समझते हैं कि इसका आपके लिए क्या अर्थ है।

1.आपका ईपीएफ खाता पूरी तरह सुरक्षित है।
इस बदलाव से आपके खाते या जमा राशि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह मुख्य रूप से कानूनी एवं प्रशासनिक सुधार है।

2.अनिवार्य पीएफ वेतन सीमा ₹15,000 प्रति माह ही रहेगी।
₹15,000 के वेतन पर अनिवार्य पीएफ अंशदान ₹1,800 (कर्मचारी का 12%) तक रहेगा। यदि आप इससे अधिक अंशदान करते हैं, तो वह स्वैच्छिक (Voluntary) माना जाएगा, जिसे आवश्यकता अनुसार कम या बंद किया जा सकता है।

3.पीएफ निकासी की श्रेणियाँ अब सरल कर दी गई हैं।
पहले 13 अलग-अलग श्रेणियाँ थीं, जिन्हें घटाकर अब केवल 3 श्रेणियाँ कर दिया गया है—

- आवश्यक जरूरतें (Essential Needs)
- आवास (Housing)
- विशेष परिस्थितियाँ (Special Circumstances)

इससे यह समझना आसान होगा कि किस स्थिति में किस प्रकार की निकासी की जा सकती है।

4.नौकरी छूटने पर 75% राशि तुरंत निकाली जा सकेगी।
नौकरी समाप्त होने या बेरोजगार होने की स्थिति में अब सदस्य अपने ईपीएफ खाते की 75% राशि तुरंत निकाल सकते हैं। शेष 25% राशि बाद में निकाली जा सकेगी, जिससे सेवानिवृत्ति के लिए कुछ बचत सुरक्षित बनी रहे।

5.पेंशन (EPS) निकासी के नियमों में बदलाव।
पहले नौकरी छूटने के बाद 2 माह की बेरोजगारी पर पेंशन संबंधी निकासी का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर 36 माह (3 वर्ष) कर दिया गया है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को समय से पहले पेंशन राशि निकालने से रोकना और उनकी दीर्घकालीन सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि, कम आय वाले कर्मचारियों के लिए यह प्रावधान चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

6.पीएफ क्लेम का निपटारा अब और तेज होगा।
जो दावे (Claims) स्वचालित जांच (Auto Check) में सही पाए जाएंगे, उनका निपटारा अब 20 दिनों के बजाय केवल 3 दिनों में किया जाएगा। साथ ही, ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है। यदि बिना उचित कारण के ईपीएफओ द्वारा क्लेम में देरी की जाती है, तो सदस्य को 12% वार्षिक दंडात्मक ब्याज (Penal Interest) देने का प्रावधान किया गया है।

7.1 अप्रैल 2026 से नया Form 121 लागू होगा।
यह नया फॉर्म Form 15G और Form 15H दोनों का स्थान लेगा। यदि आपकी आय कर योग्य सीमा से कम है, तो इस एकल स्व-घोषणा (Self Declaration) के माध्यम से टीडीएस (TDS) से बचा जा सकेगा।

निष्कर्ष

ईपीएफ योजना 2026 का उद्देश्य प्रक्रियाओं को अधिक सरल, डिजिटल एवं पारदर्शी बनाना है। क्लेम निपटान में तेजी और निकासी प्रक्रिया का सरलीकरण कर्मचारियों के लिए लाभकारी है। हालांकि, पेंशन निकासी के लिए बेरोजगारी की अवधि 36 माह किए जाने वाले प्रावधान पर भविष्य में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer)
यह जानकारी जुलाई 2026 के प्रारंभ तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। ईपीएफओ 3.0 की कुछ सुविधाएँ, जैसे UPI एवं ATM के माध्यम से निकासी, अभी अंतिम चरण में हैं। किसी भी निर्णय से पहले कृपया ईपीएफओ के आधिकारिक दिशा-निर्देशों की पुष्टि अवश्य करें।

धन्यवाद!
~Sinha & Associates
Your Trusted Tax & Payroll Compliance Partner~

06/07/2026

ईपीएफ योजना 2026 : वास्तव में क्या बदला है?

सभी ईपीएफ (EPF) सदस्यों के लिए एक महत्वपूर्ण अपडेट। पुरानी ईपीएफ योजना, 1952 के स्थान पर अब ईपीएफ योजना, 2026 लागू की गई है। आइए सरल भाषा में समझते हैं कि इसका आपके लिए क्या अर्थ है।

1.आपका ईपीएफ खाता पूरी तरह सुरक्षित है।
इस बदलाव से आपके खाते या जमा राशि पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह मुख्य रूप से कानूनी एवं प्रशासनिक सुधार है।

2.अनिवार्य पीएफ वेतन सीमा ₹15,000 प्रति माह ही रहेगी।
₹15,000 के वेतन पर अनिवार्य पीएफ अंशदान ₹1,800 (कर्मचारी का 12%) तक रहेगा। यदि आप इससे अधिक अंशदान करते हैं, तो वह स्वैच्छिक (Voluntary) माना जाएगा, जिसे आवश्यकता अनुसार कम या बंद किया जा सकता है।

3.पीएफ निकासी की श्रेणियाँ अब सरल कर दी गई हैं।
पहले 13 अलग-अलग श्रेणियाँ थीं, जिन्हें घटाकर अब केवल 3 श्रेणियाँ कर दिया गया है

आवश्यक जरूरतें (Essential Needs)
आवास (Housing)
विशेष परिस्थितियाँ (Special Circumstances)

इससे यह समझना आसान होगा कि किस स्थिति में किस प्रकार की निकासी की जा सकती है।

4.नौकरी छूटने पर 75% राशि तुरंत निकाली जा सकेगी।
नौकरी समाप्त होने या बेरोजगार होने की स्थिति में अब सदस्य अपने ईपीएफ खाते की 75% राशि तुरंत निकाल सकते हैं। शेष 25% राशि बाद में निकाली जा सकेगी, जिससे सेवानिवृत्ति के लिए कुछ बचत सुरक्षित बनी रहे।

5.पेंशन (EPS) निकासी के नियमों में बदलाव।
पहले नौकरी छूटने के बाद 2 माह की बेरोजगारी पर पेंशन संबंधी निकासी का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर 36 माह (3 वर्ष) कर दिया गया है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों को समय से पहले पेंशन राशि निकालने से रोकना और उनकी दीर्घकालीन सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना है। हालांकि, कम आय वाले कर्मचारियों के लिए यह प्रावधान चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

6.पीएफ क्लेम का निपटारा अब और तेज होगा।
जो दावे (Claims) स्वचालित जांच (Auto Check) में सही पाए जाएंगे, उनका निपटारा अब 20 दिनों के बजाय केवल 3 दिनों में किया जाएगा। साथ ही, ऑटो-सेटलमेंट की सीमा बढ़ाकर ₹5 लाख कर दी गई है। यदि बिना उचित कारण के ईपीएफओ द्वारा क्लेम में देरी की जाती है, तो सदस्य को 12% वार्षिक दंडात्मक ब्याज (Penal Interest) देने का प्रावधान किया गया है।

7.1 अप्रैल 2026 से नया Form 121 लागू होगा।
यह नया फॉर्म Form 15G और Form 15H दोनों का स्थान लेगा। यदि आपकी आय कर योग्य सीमा से कम है, तो इस एकल स्व-घोषणा (Self Declaration) के माध्यम से टीडीएस (TDS) से बचा जा सकेगा।

निष्कर्ष

ईपीएफ योजना 2026 का उद्देश्य प्रक्रियाओं को अधिक सरल, डिजिटल एवं पारदर्शी बनाना है। क्लेम निपटान में तेजी और निकासी प्रक्रिया का सरलीकरण कर्मचारियों के लिए लाभकारी है। हालांकि, पेंशन निकासी के लिए बेरोजगारी की अवधि 36 माह किए जाने वाले प्रावधान पर भविष्य में विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होगी।

अस्वीकरण (Disclaimer)
यह जानकारी जुलाई 2026 के प्रारंभ तक सार्वजनिक रूप से उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। ईपीएफओ 3.0 की कुछ सुविधाएँ, जैसे UPI एवं ATM के माध्यम से निकासी, अभी अंतिम चरण में हैं। किसी भी निर्णय से पहले कृपया ईपीएफओ के आधिकारिक दिशा-निर्देशों की पुष्टि अवश्य करें।

06/07/2026

व्यावसायिक अनुपालन जागरूकता श्रृंखला दिवस 5

क्या आपका व्यवसाय नोटिस (Notice) आने का इंतज़ार करता है, या पहले से अनुपालन (Compliance) करता है?

अनेक व्यवसायी यह सोचते हैं कि जब तक विभाग से कोई नोटिस नहीं आता, तब तक सब कुछ सही है।

लेकिन एक सफल और सुरक्षित व्यवसाय की पहचान यह नहीं कि उसे नोटिस न मिले, बल्कि यह है कि उसके सभी अभिलेख, रिटर्न और कर भुगतान इतने व्यवस्थित हों कि किसी भी समय विभागीय जाँच होने पर वह निश्चिंत रहे।

प्रत्येक व्यवसायी को ये 5 आदतें अवश्य अपनानी चाहिए—

1.समय पर सभी रिटर्न दाखिल करें
GST, TDS, Income Tax एवं अन्य वैधानिक रिटर्न निर्धारित समय पर जमा करें।

2.कर (Tax) का समय पर भुगतान करें
कर भुगतान में देरी से ब्याज एवं दण्ड दोनों लग सकते हैं।

3.सभी दस्तावेज व्यवस्थित रखें
Invoice, Purchase Bill, Bank Statement, E-way Bill, E-Invoice, Agreements एवं अन्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।

4.विभागीय ई-मेल एवं पोर्टल नियमित देखें
GST Portal एवं Income Tax Portal पर आने वाले Notice, Communication एवं Alerts समय-समय पर अवश्य जाँचें।

5.विशेषज्ञ से समय-समय पर अनुपालन की समीक्षा (Compliance Review) कराएँ
एक छोटी-सी समीक्षा भविष्य में बड़ी कर समस्या से बचा सकती है।

यह क्यों आवश्यक है?

यदि विभाग द्वारा मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो
अनावश्यक नोटिस प्राप्त हो सकते हैं।

ब्याज एवं दण्ड का जोखिम बढ़ जाता है।

ITC या अन्य कर लाभ प्रभावित हो सकते हैं।

बैंक ऋण, टेंडर एवं ऑडिट के समय कठिनाई हो सकती है।

व्यवसाय की विश्वसनीयता पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

हमेशा याद रखें

नोटिस आने के बाद सुधार करना समझदारी नहीं, बल्कि नोटिस आने से पहले सही अनुपालन करना ही एक सफल व्यवसाय की पहचान है।

आज की अनुपालन सलाह

प्रत्येक महीने केवल 30 मिनट निकालकर GST Portal, Income Tax Portal तथा अपने व्यवसाय के अनुपालन की स्थिति अवश्य जाँचें।

थोड़ा-सा समय, भविष्य की बड़ी परेशानियों से बचा सकता है।

सिन्हा एंड एसोसिएट्स
(कर सलाहकार)

आपके विश्वसनीय कर एवं वेतन अनुपालन सहयोगी

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