22/03/2026
#फाइनेंशियल ईयर 2025–26 क्लोजिंग चेकलिस्ट:-
31st मार्च नजदीक है। फाइनेंशियल ईयर की क्लोजिंग सिर्फ अकाउंट्स बंद करने का काम नहीं है। यह समय होता है अकाउंट्स, #इनकम टैक्स और #जीएसटी की पूरी समीक्षा करने का। अगर कुछ जरूरी चीजें पहले ही देख ली जाएं तो बाद में नोटिस, पेनल्टी और विवाद से काफी हद तक बचा जा सकता है।
बैलेंस शीट 31 मार्च 2026 फाइनल करने से पहले ये महत्वपूर्ण बातें जरूर देख लें —
📑 अकाउंट्स से जुड़े जरूरी काम
1️⃣ बैंक रीकन्सिलिएशन (BRS):
सभी बैंक खातों का बैंक स्टेटमेंट से मिलान कर लें। पेंडिंग चेक, बैंक चार्ज और इंटरेस्ट की एंट्री अपडेट करें।
2️⃣ डेब्टर्स और क्रेडिटर्स रीकन्सिलिएशन:
जिनसे पैसा लेना है और जिनको देना है उनका सही मिलान करें। बड़ी पार्टियों से बैलेंस कन्फर्मेशन लेना अच्छा रहता है।
3️⃣ इनकम और एक्सपेंस की सही एंट्री:
सुनिश्चित करें कि सभी आय और खर्च उसी साल में बुक हों जिससे वे रिलेटेड हैं।
4️⃣ आउटस्टैंडिंग और प्रीपेड एंट्री:
आउटस्टैंडिंग खर्च, एडवांस इनकम, प्रीपेड खर्च आदि की साल के अंत में एंट्री जरूर करें।
5️⃣ फिक्स्ड एसेट्स वेरिफिकेशन:
नए खरीदे गए एसेट्स की एंट्री सही से दर्ज करें और फिक्स्ड एसेट रजिस्टर अपडेट करें।
6️⃣ डेप्रिसिएशन लगाना:-
सभी एसेट्स पर सही रेट से डेप्रिसिएशन लगाना न भूलें।
7️⃣ क्लोजिंग स्टॉक वेरिफिकेशन:
स्टॉक का फिजिकल वेरिफिकेशन करें और सही वैल्यू से क्लोजिंग स्टॉक तय करें।
⚖️ इनकम टैक्स से जुड़े जरूरी कंप्लायंस:
8️⃣ धारा 43B:
जीएसटी, पीएफ, ईएसआई, बोनस, बैंक इंटरेस्ट आदि अगर समय पर जमा नहीं हुए हैं तो उनका खर्च टैक्स में नहीं मिलेगा।
9️⃣ धारा 43B(h) – एमएसएमई पेमेंट:
एमएसएमई सप्लायर को 45 दिन के अंदर भुगतान नहीं हुआ तो वह खर्च टैक्स में मान्य नहीं होगा। इसलिए एमएसएमई वाले क्रेडिटर्स जरूर चेक करें।
🔟 टीडीएस की जांच:
जहां टीडीएस काटना था वहां सही से काटा गया है या नहीं और समय पर जमा हुआ है या नहीं, यह जरूर देख लें।
1️⃣1️⃣ धारा 269SS / 269ST / 269T:
कैश में बड़े लेन-देन, लोन या डिपॉजिट से जुड़े नियमों की जांच कर लें।
1️⃣2️⃣ एडवांस टैक्स:
अगर टैक्स देयता बन रही है तो समय रहते एडवांस टैक्स की योजना बना लें।
🧾 जीएसटी से जुड़े जरूरी चेक
1️⃣3️⃣ जीएसटी रीकन्सिलिएशन:
बुक्स के टर्नओवर का GSTR-1, GSTR-3B और GSTR-2B से मिलान कर लें।
1️⃣4️⃣ इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC):
केवल सही और एलिजिबल आईटीसी ही क्लेम करें।
1️⃣5️⃣ आरसीएम (Reverse Charge):
जहां RCM लागू होता है वहां उसकी जांच जरूर करें।
1️⃣6️⃣ ई-इनवॉइस और ई-वे बिल:
जहां लागू हो वहां ई-इनवॉइस और ई-वे बिल की कंप्लायंस जरूर देखें।
📋 अन्य जरूरी बातें:
1️⃣7️⃣ लोन और एडवांस की समीक्षा:
सभी लोन और एडवांस का सही रिकॉर्ड और इंटरेस्ट की जांच करें।
1️⃣8️⃣ रिलेटेड पार्टी ट्रांजैक्शन:
ग्रुप या रिलेटेड पार्टी के साथ हुए ट्रांजैक्शन का सही रिकॉर्ड रखें।
1️⃣9️⃣ जरूरी प्रोविजन:
बैड डेब्ट, खर्च या टैक्स के लिए जरूरी प्रोविजन कीजिए।
✅ याद रखिए —
सही एनुअल क्लोजिंग से ही सही बैलेंस शीट और सही टैक्स प्लानिंग संभव होती है।
एक मजबूत बैलेंस शीट सिर्फ नंबर नहीं दिखाती, बल्कि बिजनेस की पारदर्शिता और अनुशासन भी दिखाती है।