10/01/2026
वाह बेटा! शाबाश अलवीरा खान,कायमखानी दाडून्दा।
इससे बड़ा गर्व क्या हो सकता है कि जब बेटी ज्ञान, आत्मविश्वास और सच्चाई के साथ अपनी पुरानी धरोहर को लेकर बात रखे।
अरावली सहित हमारी प्राचीन पहाड़ियों और नेचर से जुड़े इतिहास को जिस मजबूत आत्मविश्वास और सच्चाई के साथ आपने डेफोडिल के इस बेहतरीन पॉडकास्ट प्लेटफॉर्म में प्रस्तुत किया, वह सचमुच काबिल-ए-तारीफ है।
आपकी आवाज़ में सिर्फ शब्द नहीं थे,
बल्कि एक संस्कार, मेहनत और दुआओं की झलक भी थी —
आपके एक एक शब्द में धरती, पहाड़ और विरासत की गूंज साफ सुनाई दे रही हैं।
दुआ है बेटा,
आप यूँ ही निडर कॉन्फिडेंस, ज्ञान और सच्चाई के साथ आगे बढ़ती रहें —
क्योंकि जब बेटियाँ इस तरह नेचर पर बोलती हैं,
तो पूरे समाज का सिर गर्व से ऊँचा हो जाता है
और आने वाली पीढ़ियाँ अपनी जड़ों से जुड़ना सीखती हैं।
दिल से धन्यवाद
Daffodil Kids Vimal Bhardwaj जी और दीपिका मैम सोनल मेम को —
जिन्होंने सोचने वाले, बोलने वाले और पुरानी विरासतो को याद दिलाने वाले बच्चों को मंच दिया।
ऐसे मंच बच्चों को केवल बोलना ही नहीं,
बल्कि अभिव्यक्ति की आजादी का सही अर्थ और आत्मविश्वास का महत्व भी सिखाते हैं।
ऐसे प्रयास ही समाज को जगाते हैं,
और आने वाले कल के लिए संस्कारवान, समझदार और संवेदनशील पीढ़ी तैयार करते हैं।
शुक्रिया उन तमाम लोगों का जिन्होने ये पॉडकास्ट प्रोग्राम को व्यवस्थित