07/11/2025
कल मैं गोरखपुर पुस्तक महोत्सव में गया था, मुझे बहुत ही अच्छा लगा, मैने वहां तस्वीर भी खिंचवाई और कुछ वीडियो भी बनाया, लेकिन वहां पर मुझे एक बहुत ही अच्छी चीज दिखी, उसका भी मैंने फोटो लिया, जो कि इस पहली तस्वीर के बाद है।
, यह महोत्सव पुस्तक का था, वहां पर बहुत सारी पुस्तकें थीं, और उनको खरीदने और पढ़ने वाले भी बहुत सारे लोग,, लेकिन ढाई अक्षर का एक शब्द होता है "प्रेम"जो कि हमारी पहली तस्वीर के बाद, एक माता और उसके बच्चे में दिखाई दे रहा है,,लेकिन मुझे लगता है कि यह ढाई अक्षर का शब्द, उन सभी किताबों के नीचे कहीं दब सा गया है,, तस्वीर में जो माता और बच्चे के बीच का प्रेम दिखाया जा रहा है, वह अब सिर्फ तस्वीरें और मूर्तियों में ही दिखाई देता है, लेकिन अगर वास्तविक नजर से देखा जाए, तो मां कहीं डेरी फार्म, कहीं किसी घर के तबेले में अपने बच्चों को ढूंढती, और उसका बच्चा ( मुख्यत:बेटा)रोड पर कहीं, बिलखता बेसहारा, तड़पता, रोता हुआ दिखाई देता है, आखिर हम इतना ज्ञान लेकर क्या करेंगे, जब हमें किसी का दर्द पीड़ा कष्ट, दिखाई ना दे।और हम उसकी प्रेम को ना समझ पाए,और अपने अंदर के प्रेम को मार दें।
मैं पता नहीं कितना समझ पाया हूं इस चीज को, लेकिन कोशिश कर रहा हूं इसको समझने की,🙂
हो सकता है उस महोत्सव में, ऐसे लोग भी आए होंगे जो इसको बहुत अच्छे से समझते हैं, जो की जरूरी भी हैं, लेकिन इसकी भी एक किताब होनी चाहिए, और अगर है तो उन सभी किताबों के ऊपर दिखनी चाहिए।
#गयाहमारीमाता
Vegan.com
Pinki Sharma.