The Life Planner Financial Health Expert

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12/07/2024
मैं नास्तिक क्यों हूँ 2
12/07/2024

मैं नास्तिक क्यों हूँ 2

शहीद भगत सिंह की "मैं नास्तिक क्यों हूँ": क्रांतिकारी विचारों का अमर वीडियो!जय भारत! जय संविधान! 🇮🇳आज हम आपके लिए ला.....

महात्रिफलादि घृत औषधि MAHATRIFLADI GHRITAhttps://www.youtube.com/watch?v=-Y3m6jVByfsFind my channel on YouTube
25/01/2024

महात्रिफलादि घृत औषधि MAHATRIFLADI GHRITA
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"Introducing the Ayurvedic Elixir - 'Triphaladi Ghrita Medicine'! In this enlightening YouTube video, we delve into the extraordinary world of Triphaladi Ghr...

12/05/2023
16/06/2019

मूत्र में खून के कारण और इससे जुड़े तथ्‍य

रक्‍तमेह की पहचान माइक्रोस्‍कोप से की जाती है।
इसमें रक्‍त कोशिकायें माइक्रोस्‍कोप से दिखती है।
निदान के लिए मूत्र के नमूने की जांच होती है।
इसके कारणों के आधार पर इसका उपचार होता है।
मूत्र में खून यानी रक्‍तमेह (Hematuria) की पहचान आसानी से नहीं की जा सकती है, क्‍योंकि ज्‍यादातर मामलों में इसे केवल माइक्रोस्‍कोप के जरिये ही देखा जा सकता है। इसके मूल्‍यांकन के लिए पूरे मूत्र पथ यानी यूरीनरी ट्रैक्‍ट का परीक्षण किया जाता है। इसके निदान के लिए मूत्र के नमूने की जांच की जाती है, इसके अलावा सीटी स्‍कैन, सिस्‍टोस्‍कोपी और यूरीन सिटोलॉजी की जाती है। मूत्र में रक्‍त का प्रबंधन इसके मूल कारणों पर निर्भर करता है। इसके बारे में विस्‍तार से जानने के लिए इस लेख को पढ़ें।

मूत्र में खून
रक्‍तमेह यानी मूत्र में खून कुछ मामलों में तो दिखाई दे जाता है, लेकिन ज्‍यादातर मामलों में इसकी पहचान माइक्रोस्‍कोपिक (इसमें रक्‍त कोशिकायें केवल माइक्रोस्‍कोप से दिखती हैं) होती हैं। सकल रक्तमेह की उपस्थिति व्‍यापक रूप में भिन्‍न हो सकती है, ये हल्‍के गुलाबी या गहरे लाल रंग के थक्‍के के साथ होते हैं। हालांकि इसमें समस्‍या से ग्रस्‍त होने पर मूत्र में रक्‍त की मात्रा अलग-अलग हो सकती है, मूत्र की मात्रा के आधार पर ही इसका अवलोकन, परीक्षण और उपचार किया जाता है।

जिन लोगों के मूत्र में रक्‍त दिखता है वे सामान्‍यतया चिकित्‍सक से संपर्क करते हैं, लेकिन जिनको यह नहीं दिखता है उनको बाद में अधिक समस्‍या हो सकती है। इसलिए अगर पेशाब करने में कोई समस्‍या है तो नियमित रूप से मूत्र के नमूने की जांच कराते रहना चाहिए।

रक्‍तमेह के कारण
हालांकि सकल और सूक्ष्‍म रक्‍तमेह के कारण एक जैसे हो सकते हैं, इन दोनों प्रकार की समस्‍या होने पर मूत्रमार्ग से कहीं से भी खून बहने की शिकायत हो सकती है। इसमें से किसी प्रकार में यह निर्धारित नहीं किया जा सकता है कि खून किडनी, मूत्रवाहिनी (यह एक प्रकार की ट्यूब होती है जो किडनी से मूत्राशय में मूत्र ले जाती है), मूत्राशय आदि जगह से निकल रहा है। इसका निर्धारण और मूल्‍यांकन चिकित्‍सक की कर सकता है।

मूत्र में संक्रमण इसे मूत्र मार्ग संक्रमण या यूटीआई भी बुलाते हैं। इसमें मूत्र जीवाणुरहित होता है और किसी प्रकार के जीवाणु इसमें नहीं होते हैं। गुर्द की पथरी की समस्‍या से भी अगर व्‍यक्ति ग्रस्‍त है तो परेशानी और बढ़ सकती है। इस समस्‍या को किडनी की बीमारी से जोड़कर देखा जाता है। कुछ दवायें जिनके कारण खून के थक्‍के बन सकते हैं, जैसे - एस्‍पीरिन, वारफेरिन आदि भी इसके लिए जिम्‍मेदार कारण हो सकते हैं, इनके कारण मूत्र में खून आने की समस्‍या भी हो सकती है। ब्‍लैडर कैंसर होने पर भी रक्‍तमेह हो सकता है।

निदान और उपचार
रक्‍तमेह के निदान के लिए मूत्र का नमूना लेकर उसकी जांच की जाती है, इसके अलावा सीटी स्‍कैन, सिस्‍टोस्‍कोपी और यूरीन सिटोलॉजी के जरिये इसका निदान होता है। चिकित्‍सक आपके शारीरिक परीक्षण और इससे पहले हुई किसी भी प्रकार की समस्‍या के बारे में जानकारी ले सकता है, यानी आप पहले से कोई दवा तो प्रयोग नहीं कर रहे हैं जो इसका कारण बन सकता है।

चिकित्‍सक इस समस्‍या से उपचार के पहले इसके पीछे जिम्‍मेदार कारणों और लक्षणों के आधार पर इसका उपचार करता है। इसके उपचार से पहले रक्‍तचाप और किडनी का परीक्षण किया जाता है, अगर किडनी सही तरीके से काम नहीं कर रही है तो उसका उपचार किया जायेगा, अगर रक्‍तचाप असामान्‍य है तो उसे समान्‍य किया जायेगा। अगर व्‍यक्ति की उम्र 50 से अधिक है तो उसका उपचार अलग तरीके से होता है।

इस समस्‍या को सामान्‍य बिलकुल न लें, क्‍योंकि यह ब्‍लैडर कैंसर के कारण भी हो सकता है, जो कि बहुत खतरनाक है। अगर मूत्र त्‍यागने में किसी प्रकार की समस्‍या हो, रक्‍तचाप असामान्‍य हो और किडनी संबंधित कोई समस्‍या हो तो तुरंत चिकित्‍सक से संपर्क कीजिए।

Trip to gyani chor ki gufaaaaaa
07/08/2017

Trip to gyani chor ki gufaaaaaa

12/07/2016

सफलता का सबक
एक आठ साल का लड़का गर्मी की छुट्टियों में अपने दादा जी के पास गाँव घूमने आया। एक दिन वो बड़ा खुश था, उछलते-कूदते वो दादाजी के पास पहुंचा और बड़े गर्व से बोला, ” जब मैं बड़ा होऊंगा तब मैं बहुत सफल आदमी बनूँगा। क्या आप मुझे सफल होने के कुछ टिप्स दे सकते हैं?”
दादा जी ने ‘हाँ’ में सिर हिला दिया, और बिना कुछ कहे लड़के का हाथ पकड़ा और उसे करीब की पौधशाला में ले गए।
वहां जाकर दादा जी ने दो छोटे-छोटे पौधे खरीदे और घर वापस आ गए।
वापस लौट कर उन्होंने एक पौधा घर के बाहर लगा दिया और एक पौधा गमले में लगा कर घर के अन्दर रख दिया।
“क्या लगता है तुम्हे, इन दोनों पौधों में से भविष्य में कौन सा पौधा अधिक सफल होगा?”, दादा जी ने लड़के से पूछा।
लड़का कुछ क्षणों तक सोचता रहा और फिर बोला, ” घर के अन्दर वाला पौधा ज्यादा सफल होगा क्योंकि वो हर एक खतरे से सुरक्षित है जबकि बाहर वाले पौधे को तेज धूप, आंधी-पानी, और जानवरों से भी खतरा है…”
दादाजी बोले, ” चलो देखते हैं आगे क्या होता है !”, और वह अखबार उठा कर पढने लगे।
कुछ दिन बाद छुट्टियाँ ख़तम हो गयीं और वो लड़का वापस शहर चला गया।
इस बीच दादाजी दोनों पौधों पर बराबर ध्यान देते रहे और समय बीतता गया। ३-४ साल बाद एक बार फिर वो अपने पेरेंट्स के साथ गाँव घूमने आया और अपने दादा जी को देखते ही बोला, “दादा जी, पिछली बार मैं आपसे successful होने के कुछ टिप्स मांगे थे पर आपने तो कुछ बताया ही नहीं…पर इस बार आपको ज़रूर कुछ बताना होगा।”
दादा जी मुस्कुराये और लडके को उस जगह ले गए जहाँ उन्होंने गमले में पौधा लगाया था।
अब वह पौधा एक खूबसूरत पेड़ में बदल चुका था।
लड़का बोला, ” देखा दादाजी मैंने कहा था न कि ये वाला पौधा ज्यादा सफल होगा…”
“अरे, पहले बाहर वाले पौधे का हाल भी तो देख लो…”, और ये कहते हुए दादाजी लड़के को बाहर ले गए.
बाहर एक विशाल वृक्ष गर्व से खड़ा था! उसकी शाखाएं दूर तक फैलीं थीं और उसकी छाँव में खड़े राहगीर आराम से बातें कर रहे थे।
“अब बताओ कौन सा पौधा ज्यादा सफल हुआ?”, दादा जी ने पूछा।
“…ब..ब…बाहर वाला!….लेकिन ये कैसे संभव है, बाहर तो उसे न जाने कितने खतरों का सामना करना पड़ा होगा….फिर भी…”, लड़का आश्चर्य से बोला।
दादा जी मुस्कुराए और बोले, “हाँ, लेकिन challenges face करने के अपने rewards भी तो हैं, बाहर वाले पेड़ के पास आज़ादी थी कि वो अपनी जड़े जितनी चाहे उतनी फैला ले, आपनी शाखाओं से आसमान को छू ले…बेटे, इस बात को याद रखो और तुम जो भी करोगे उसमे सफल होगे- अगर तुम जीवन भर safe option choose करते हो तो तुम कभी भी उतना नहीं grow कर पाओगे जितनी तुम्हारी क्षमता है, लेकिन अगर तुम तमाम खतरों के बावजूद इस दुनिया का सामना करने के लिए तैयार रहते हो तो तुम्हारे लिए कोई भी लक्ष्य हासिल करना असम्भव नहीं है!
लड़के ने लम्बी सांस ली और उस विशाल वृक्ष की तरफ देखने लगा…वो दादा जी की बात समझ चुका था, आज उसे सफलता का एक बहुत बड़ा सबक मिल चुका था!
दोस्तों, भगवान् ने हमें एक meaningful life जीने के लिए बनाया है। But unfortunately, अधिकतर लोग डर-डर के जीते हैं और कभी भी अपने full potential को realize नही कर पाते। इस बेकार के डर को पीछे छोडिये…ज़िन्दगी जीने का असली मज़ा तभी है जब आप वो सब कुछ कर पाएं जो सब कुछ आप कर सकते हैं…वरना दो वक़्त की रोटी का जुगाड़ तो कोई भी कर लेता है…
सफलता का सबक
इसलिए हर समय play it safe के चक्कर में मत पड़े रहिये…जोखिम उठाइए… risk लीजिये और उस विशाल वृक्ष की तरह अपनी life को large बनाइये

01/02/2016

क्या आपके एजेंट के पास हैं ये योग्ताएं?
वित्त जगत में विभिन्न तरह के एजेंट के बारे में आप अक्सर
सुनते हैं। आप एजेंट के कार्यों के बारे में भी जानते
हैं। लेकिन कभी इस बात पर ज्यादा गौर
नहीं करते कि एजेंट बनने के लिए आवश्यक
अर्हर्ताएं क्या होती है? एक एजेंट को किस तरह के
शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण संबंधी आवश्यकताओं को
पूरा करना होता है? क्या एजेंट बनना बहुत मुश्किल है या फिर यह
बच्चों का खेल है एवं कोई भी आदमी
एजेंट बन सकता है? इस लेख के माध्यम से हम एजेंट,
सलाहकार, प्लानर आदि की आवश्यक योग्यताओं तथा
उससे जुड़े अन्य जरूरी तथ्यों पर गौर कर रहे हैं।
बीमा एजेंट
बीमा एजेंट बनना कोई मुश्किल काम नहीं
है। इसके लिए न्यूनतम योग्यता का कोई अंतिम पैमाना निर्धारित
नहीं किया गया है। यहां भारतीय
जीवन बीमा निगम का उदाहरण लें।
एलआईसी ने 5000 की
आबादी वाले गांवों के लिए 10वीं एवं
शहरी क्षेत्रों के 12वीं पास होना अनिवार्य
किया है। जहां तक उम्र की बात है तो इसके लिए
भी कोई निश्चित पैमाना नहीं है मसलन
बीमा एजेंट बनने के लिए एलआईसी ने 18
वर्ष की न्यूनतम आयु अनिवार्य किया है।
दूसरी बीमा कंपनियों में संभव है इसमें
भिन्नता हो सकती है। बीमा एजेंट बनने के
लिए इंश्योरेंस इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की
परीक्षा पास करना आवश्यक है।
आईआरडीए द्वारा अनुमोदित प्रशिक्षण केंद्र से 50
घंटे और संयुक्त बीमा (जीवन और
साधारण) एजेंसी के मामले में 75 घंटे का व्यवहारिक
प्रशिक्षण पूर्ण करना अनिवार्य है जो क्रमश: तीन
सप्ताह से चार सप्ताह तक विस्तारित होता है। अगर आपने कुछ
अतिरिक्त व्यावसायिक योग्यता प्राप्त की है तो क्रमश:
दस और पच्चीस घंटे की छूट
दी जा सकती है। विद्यमान एजेंट के लिए
दूसरी बार नवीनीकरण के लिए
क्रमश: पच्चीस और पच्चास घंटे का प्रशिक्षण
पूर्ण करना आवश्यक होता है। आईआरडीए को
लाईसेंस शुल्क के रूप में 250 रुपये देना होता है। बैंक ड्राफ्ट
आवेदन फॉर्म के साथ रिपोर्टिंग कार्यालय के संबंधित व्यक्ति को
प्रस्तुत करना होता है।
ऑनलाइन परीक्षा:अब तो बीमा एजेंट
की परीक्षा ऑनलाइन तरीके
से भी ली जाती है। लेकिन
इसके लिए आपके पास मोबाइल फोन एवं ईमेल आईडी
होना बेहद जरूरी है। ऑनलाइन संबंधी
फर्जीवाड़े को रोकने के लिए अब परीक्षा
एवं प्रशिक्षण के दौरान हर सत्र का अलग-अलग कोड आपके
मोबाइल पर भेजा जाता है। एक आईडी से एक
ही बार लॉग-इन किया जा सकता है। इसके अलावा अब
तो ऑनलाइन तरीके से दस्तखत एवं फोटो का
भी मिलान किया जाता है।
म्यूचुअल फंड एजेंट/डिस्ट्रीब्यूटर
म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में अधिकृत
डिस्ट्रीब्यूटर बनने के लिए नेशनल
इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्युरिटीज मार्केट
(एनआईएसएम) द्वारा आयोजित परीक्षा पास करना
जरूरी होता है। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में
अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटर बनने के लिए नेशनल
इंस्टीट्यूट ऑफ सिक्युरिटीज मार्केट द्वारा
आयोजित परीक्षा में 50
फीसदी अंकों से उत्तीर्ण होने
के बाद उस सर्टिफिकेट को एम्फी के समक्ष प्रस्तुत
करना होता है। वहां इसकी जांच के बाद आपको एक
प्रमाण पत्र जारी किया जाता है। एम्फी
ही आपको एआरएन नंबर भी देता है।
एआरएन सर्टिफिकेट (एम्फी रजिस्ट्रेशन नंबर) के
साथ मनोयन फॉर्म की एक कॉपी संबंधित
म्यूचुअल फंड कार्यालय को भेजी जाती है
जहां अभ्यर्थी द्वारा परिचालन प्रस्तावित किया गया है।
उसके बाद म्यूचुअल फंड कंपनी संबंधित फॉर्म
की समीक्षा करता है एवं हर तरह से
संतुष्ट होकर प्रत्याशी (संभावित
डिस्ट्रीब्यूटर) को मनोयन पत्र भेजता है। इतना
ही नहीं प्रत्याशी को तमाम
आवश्यक कागजातों (मसलन फॉर्म, फैक्टशीट,
मार्केटिंग सामग्री) के साथ कोड नंबर भी
भेजता है। इन प्रक्रियाओं को पूरी तरह से अंजाम देने
के बाद कोई व्यक्ति किसी म्यूचुअल फंड
कंपनी का पूर्ण रूप से डिस्ट्रब्यूटर बन जाता है।
इन पर्सन वैरीफिकेशन: म्यूचुअल फंड में निवेश को
ज्यादा सुरक्षित बनाने के मकसद से केवाईसी
आवश्यकताओं के मद्देनजर इन पर्सन वैरिफिकेशन
(आईपीवी) को भी अनिवार्य
कर दिया गया है। इसके तहत निवेशक को फंड हाउस में जाकर
अपना फिजिकल वैरिफिकेशन कराना पड़ता है। हालांकि, इससे निवेशकों
को काफी असुविधा का भी सामना करना पड़ता
है। अजीबोगरीब रूप से इसे निवेशकों के
लिए अनिवार्य किया गया है कि वे ही फंड हाउस में
जाकर इन पर्सन वैरीफिकेशन कराएं।
केवाईडी से लैस डिस्ट्रीब्यूटर से
भी इन पर्सन वैरीफिकेशन
(आईपीवी) कराया जा सकता है।
उद्देश्य: डिस्ट्रीब्यूटर बनने के लिए आयोजित किए
जाने वाले परीक्षा का मुख्य उद्देश्य एमएफ उत्पाद
बेचने की चाह रखने वाले प्रत्येक व्यक्ति
की विषय से संबंधित न्यूनतम जानकारी को
जांचना होता है
आवेदन की प्रक्रिया: एमएफ
डिस्ट्रीब्यूटर बनने के लिए ऑनलाइन एवं ऑफलाइन
दोनों तरीकों से आवेदन किया जा सकता है।
सेबी के नियमों के अनुसार रजिस्ट्रेशन करने के 180
दिनों के भीतर परीक्षा लेना अनिवार्य होता
है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की वेबसाइट के जरिए
ऑनलाइन फॉर्म भरा जा सकता है।
रिकवरी एजेंट
सभी रिकवरी एजेंट के पास इंडियन
इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग एंड फायनेंस से द्वारा निर्गत
प्रमाण पत्र रखना आवश्यक है। हालांकि इस प्रमाण पत्र
की प्राप्ति के लिए उन्हें संबंधित विभाग द्वारा
ली गई परीक्षा को पास करना
जरूरी होता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने
रिकवरी एजेंट की भर्ती के
लिए परीक्षा आयोजित करने हेतु इंडियन
इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग फायनेंस
(आईआईबीएफ) को अधिकृत किया है।
रिकवरी एजेंट बनने के लिए इस संस्था से प्रमाण पत्र
हासिल करना अनिवार्य है।
रिकवरी एजेंट बनना कोई बहुत मुश्किल काम
नहीं है। नियमों के अनुसार इसके लिए विशेष शैक्षणिक
योग्यता की भी जरूरत नहीं
है। अलग-अलग एजेंसियों के लिए शैक्षणिक योग्यता का पैमाना
अलग-अलग हो सकता है। हालांकि अभ्यर्थी का हाई
स्कूल पास होना आवश्यक माना जाता है परंतु यदि वह स्नातक है
तो बेहतर ही है। हालांकि आजकल इस क्षेत्र मे
भी प्रतियोगिता काफी बढ़ गई है एवं
रिकवरी एजेंट रखने वाली एजेंसियां वैसे
अभ्यर्थियों को ज्यादा तरजीह देती हैं
जिनके पास कस्टमर केयर सर्विस का पूर्व अनुभव हो। इसके बाद
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के निर्देशों के अनुसार प्रत्येक एजेंट का
सेवा शुरू करने से पहले पर्याप्त प्रशिक्षण लेना अनिवार्य होता
है। रिकवरी एजेंट के लिए कम से कम 100 घंटे
की ट्रेनिंग अनिवार्य की गई है। कैनरा बैंक
के वरिष्ठ प्रबंधक अजय कुमार वर्मा का कहना है कि आजकल
बैंक रिकवरी एजेंसियों की सेवाएं लेते हैं
इसलिए उन्हें ट्रेनिंग देने की जिम्मेदारी
भी उन्हीं को पूरी
करनी होती है। हालांकि बैंक उन्हें
अनुबंधित करने से पहले प्रशिक्षण प्रमाण पत्र अवश्य देखते
हैं।
सर्टिफायड फायनेंसियल प्लानर
हर किसी को इस बात की इच्छा
होती है कि बेहतर एवं सुनयोजित निवेश से उसके धन
में बढ़ोतरी हो। कुछ लोग स्वयं ही निवेश
की योजना को तैयार करते हैं परंतु हमारे आस-पास
काफी लोग ऐसे हैं जिनके पास निवेश करने एवं इससे
जुड़ी बारीकियों पर नजर रखने का वक्त
नहीं है। ऐसे में एक सर्टिफायड फायनेंसिल प्लानर ऐसे
लोगों के निवेश पर नजर रखता है। हालांकि एक सर्टिफायड प्लानर
बनने के लिए आपको संबंधित क्षेत्र का आवश्यक प्रमाण पत्र
लेना होता है। दरअसल सर्टिफायड फायनेंसियल प्लानिंग कोर्स
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य है। इसे
करीब 20 से ज्यादा देशों में मान्यता दी गई
है। जहां तक भारत का सवाल है तो भारत में फायनेंसियल प्लानिंग
स्टैंडर्ड बोर्ड इंडिया (एफपीएसबी),
फायनेंसियल प्लानिंग क्वालिफिकेशन को प्रमाणित करता है। इस
कोर्स में तमाम तरह के विषयों मसलन इंवेस्टमेंट, इस्टेट प्लानिंग,
इंश्योरेंस, टैक्सेशन एवं रिटायरमेंट प्लानिंग आदि को कवर किया जाता
है। एक बार जब आप इस प्रमाण पत्र को हासिल कर लेते हैं तो
आप सभी तरह की वित्तीय
सलाह एवं सेवाएं प्रदान करने के योग्य हो जाते हैं।
सर्टीफायड फायनेंसियल प्लानर
(सीएफपी) को वित्तीय क्षेत्र
में निवेश की सलाह देने वाले अन्य प्रोफेशनल्स से
ज्यादा तरजीह दी जाती है।
पोस्ट ऑफिस एजेंट
पोस्ट ऑफिस एजेंट बनने के लिए किसी खास
शैक्षणिक योग्यता की जरूरत नहीं है।
हालांकि इन दिनों उत्पादों की जानकारी
सही तरीके से देने पर जोर दिया जा रहा
है। इसके बाबत यदि अभ्यर्थी के पास
दसवीं, 12 वीं या स्नातक की
डिग्री है तो यह सही माना जाता है। यदि
आप एजेंट बनना चाहता है तो अपने पास के पोस्ट ऑफिस में
जाकर पोस्ट मास्टर से मिलें। वहां अपनी इच्छा जाहिर
करें। पोस्ट मास्टर आपसे आपके आवास की
जानकारी मांगेगा। संभव है कि आपको प्रमाण पत्र
की कॉपी जमा करना पड़े। वहां आपको एक
फॉर्म भरना पड़ेगा जिसमें आपसे व्यवसाय, निवास स्थान एवं शिक्षा
आदि के संबंध में जानकारी मांगी
जाएगी। उसके बाद आपको प्रमाण पत्र
जारी कर दिया जाएगा।
पोस्टल डिपार्टमेंट के एक वरिष्ठ अधिकारी अरशद खान
का कहना है कि पोस्ट ऑफिस एजेंट बनने के लिए विभाग इन दिनों
कई तरह के प्रोत्साहन अभियान चला रहा है। उन्हें बेहतर
प्रशिक्षण एवं अन्य सुविधाएं भी देने की
तैयारी की जा रही है ताकि
एजेंटों की संख्या को बढ़ाई जा सके। प्रत्येक इच्छुक
व्यक्ति को अपने नजदीकी डाकघर में
पोस्ट मास्टर से मिलना चाहिए। वहां ज्यादा कागजाती
झमेले में नहीं डाला जाता एवं विभाग से जोडऩे में मदद
की जाती है।

01/02/2016

कड़वा सच

शादी के पहले और शादी के बाद

शादी को इस ब्रह्मांड में सबसे मजूबत बंधन माना जाता
है। यह केवल दो आत्माओं का मिलन ही
नहीं है, बल्कि दो संस्कृतियों को जोडऩे का काम करता
है। यह दो अलग-अलग परिवारों को कभी न टूटने वाले
बंधन में हमेशा के लिए खुशियां और जिम्मेदारियों के लिए बांधता है।
शादी करना किसी के भी
जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय होता है। लेकिन
शादी के बाद जहां एक रोमानी दुनिया शुरू
होती है, वहीं वित्तीय मामले
में हकीकत काफी बदल जाती
है। जो लोग शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं, उनके
लिए यहां हम कुछ जानकारियां दे रहे हैं कि वे किस तरह से
अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को निभाएं ताकि
आगे चलकर दिक्कत पेश न हो।
शादी से पहले किन बातों पर करें गौर
शादी के पहले कोई खास जिम्मेदारी
नहीं होती इसलिए लोग बचत, निवेश,
बीमा आदि के मामले में बहुत जिम्मेदारी से
काम नहीं करते। लेकिन शादी के बाद तो
एक व्यवस्थित जीवन बिताना जरूरी हो
जाता है, इसलिए अगर आप शादी करने जा रहे हैं तो
सिर्फ रोमांस की रोमानी दुनिया से थोड़ा
वित्तीय मामलों की
जमीनी दुनिया पर भी गौर कर
लें।
पता करें कि पार्टनर के ऊपर कोई कर्ज तो नहीं
अपने मंगेतर से पूछें कि उसके सिर पर किसी तरह का
कर्ज तो नहीं है और यदि है तो कितना है?
शादी से पहले यदि कॉफी टेबल पर मुलाकात
होती है तो वहीं पर अपनी
बचत, निवेश और कर्ज के आंकड़ों का आदान-प्रदान करना बेहतर
रहेगा। इस बारे में बात करें कि एक-दूसरे के सिर से कर्ज का बोझ
कैसे हटाया जा सकता है, इस बारे में भी चर्चा कर लें
कि आगे कर्ज कैसे निपटाएंगे, संयुक्त रूप से या अलग-अलग।
क्या आपने कोई निवेश किया है
यदि आप दोनों ने या किसी एक ने कोई निवेश किया है तो
शादी के बाद उनको किस तरह से हैंडल किया जाएगा।
क्या शादी के बाद आप इसे संयुक्त रूप से चलाना
चाहते हैं, अगर हां तो इसकी जानकारी
करिए कि इसकी प्रक्रिया क्या होती है।
क्या इससे टैक्स के लिहाज से कोई फायदा होगा। यह
भी ध्यान रखना होगा कि आपको किस तरह से बढिय़ा
रिटर्न मिल सकता है।
शादी के बाद कहां रहना है
शादी से पहले आपको अपने मंगेतर से इस बारे में
भी चर्चा कर लेनी चाहिए कि
शादी के बाद आप दोनों को कहां रहना है, खासकर यदि
आप संयुक्त परिवार में नहीं बल्कि अकेले रहते हों।
इसका मतलब इस बात पर राय-मशविरा करना है कि आप दोनों कितने
तक का मकान किराए पर ले सकते हैं। ध्यान रहे कि मकान का
किराया या यदि मकान खरीद रहे हैं तो
उसकी ईएमआई आप दोनों के कुल मासिक आय के
करीब 25 से 30 फीसदी तक
ही हो।
शादी के बाद की कैसे निभाएं जिम्मेदारियां
शादी के बाद आपकी जोखिम लेने
की क्षमता कम हो जाएगी और आपको
कुछ वित्तीय स्थिरता की भी
जरूरत होगी। शादी के बाद कोई
भी प्लानिंग करने से पहले आपको अपने पार्टनर के
साथ अच्छी तरह विचार-विमर्श करना बहुत
जरूरी है। इससे आपको इस बात का सही
अंदाजा लग जाएगा कि आप दोनों की कुल आय और
खर्च कितना है। उदाहरण के लिए यदि आपकी नियमित
आय नहीं है और पति या पत्नी
की नियमित आय है तो आपको अपने सभी
ईएमआई के भुगतान के लिए ज्वाइंट एकाउंट खोलना चाहिए। आपको
इसकी जानकारी होनी चाहिए कि
बैंक एकाउंट शेयर कैसे किया जा सकता है और संयुक्त
तरीके से बिल का भुगतान किस तरह से हो सकता है।
बहुत से लोग तीन बैंक एकाउंट रखते हैं, एक ज्वाइंट
एकाउंट और दो अपने-अपने अलग एकाउंट।
जिम्मेदारियों को साझा करें
आम तौर पर हमारे समाज में लोगों का यह कहना है कि
शादी का दूसरा नाम जिम्मेदारी है और यह
बिल्कुल सत्य भी है। शादी के बाद जोड़े
एक दूसरे के प्रति उत्तरदायी होते हैं और इन
जिम्मेदारियों का वहन साथ मिलकर करते हैं। चाहे वह
वित्तीय मामला हो या फिर कोई पारिवारिक मसला, हमेशा
से यह बुद्धिमानी भरा कदम होता है कि इनको कैसे
साथ मिलकर निपटाया जाए। जिम्मेदारियों को साझा करने का फायदा यह
होता है कि आपके पास अपने वित्तीय खर्चों के ट्रैक
रिकॉर्ड के साथ पार्टनर के खर्चों का ब्योरा भी
आसानी से उपलब्ध रहता है। इससे विवाहित जोड़े को
इस बात का पता बड़े सहज रूप से पता चल जाता है कि उनके लिए
क्या अच्छा है। इससे वित्तीय मामलों पर नियंत्रण
करना काफी आसान हो जाता है।
वित्तीय मामलों से जुड़ी कोई
भी जानकारी एक-दूसरे से
नहीं छुपाएं
कुछ बातों को अपने पार्टनर से छुपाना सही हो सकता
है लेकिन बात जब शादी के बाद के वित्तीय
मामलों से जुड़ा हो तो ऐसा कभी नहीं होना
चाहिए। विवाहित जोड़े को वित्तीय मामलों से जुड़े
सभी मसलों पर आपस में खुलकर बातचीत
करनी चाहिए। ऐसा करने से चीजें आसान
हो जाती हैं। कभी ऐसा समय आता है
जब एक पार्टनर के लिए अपनी वित्तीय
जरूरतों को पूरा करना काफी चुनौती भरा होता
है वैसे में दूसरा पार्टनर उसे आसानी से मैनेज कर लेता
है। किसी अनहोनी को रोकने के लिए अपने
पार्टनर से हरेक वित्तीय आदतों को साझा करना उतना
ही महत्वपूर्ण होता है।
उचित बजट बनाएं
किसी भी चीज में उचित बजट
नहीं होने से इसका व्यक्ति के निवेश औऱ बचत पर
लगातार असर पडऩा लाजिमी है। यह बात बिल्कुल
सही है कि एक बार अगर यह सिलसिला शुरू हो गया तो
गृहस्थी की गाड़ी को दोबारा
पटरी पर लाना बहुत ही मुश्किल होता है।
सबसे खराब परिदृश्य में कभी-कभी अंत
में यह आपको दिवालियापन की ओर लेकर जा सकता
है। आय और निवेश के आधार पर बजट बनाने का फायदा यह होता
है कि पार्टनर अपने को वित्तीय रूप से टूटने से बचा
सकने में सक्षम होते हैं। इससे चीजें उनके लिए
आसान भी हो जाती हैं। पूरी
अच्छी तरह से बजट तैयार किए जाने पर
आपकी आय में बढ़ोतरी भले
ही नहीं हो पाए लेकिन इतना तो तय है कि
आपकी सेविंग में बढ़ोतरी जरूर हो
जाएगी।
जिम्मेदारियों का बंटवारा करें
कभी कभी ऐसा भी होता है
दायित्वों का उचित बंटवारा नहीं होने से सही
बजट बनने के बाद भी इसके फेल होने के चांस रहते
हैं। केवल किसी स्कीम को लेकर किए गए
प्लानिंग और विचारों का लेनदेन ही किसी
जोड़े के लिए मजबूत वित्तीय आधार नहीं
हो सकते हैं। दायित्वों का बंटवारा पार्टनर के बीच उचित
तरीके से होना चाहिए। उदाहरण के लिए, किचेन के
सामान लाने और उसे व्यवस्थित रखने की
जिम्मेदारी पत्नी को दी जा
सकती है, वहीं घर के दूसरे मासिक बिलों
के भुगतान आदि की जिम्मेदारी पति संभाल
सकता है। ऐसा करने से विवाहित जोड़े के लिए काम
काफी आसान हो जाता है और समय की
बचत हो जाती है।
उचित इंश्योरेंस कवर जरुर लें
शादी के बाद कई तरह की जिम्मेदारियां
आती हैं। इसलिए आपको बीमा कवर बढ़ाना
चाहिए। यदि आपके पास व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस कवर है तो
उसे फेमिली फ्लोटर प्लान में बदलना चाहिए। अधिकतर
मामलों में ऐसा देखा गया है कि अविवाहित लोग इंश्योरेंस कवर
नहीं लेते हैं। ऐसा उत्तरदायित्व नहीं होने
की वजह से होता है। लेकिन परिस्थितियों में बदलाव
शादी के बाद जल्दी से होता है क्योंकि
आप अब एक से दो हो गए हैं। शादी से पहले
व्यक्तिगत तौर पर लोग मस्ती की
जिंदगी बिताने में यकीन करते हैं लेकिन
शादी के बाद यह तरीका बिल्कुल काम
नहीं करता है। शादी के बाद आपको अपने
इंश्योरेंस कवरेज के बारे में जांच करनी चाहिए और
अगर लगता है कि यह बहुत कम है तो तत्काल अपना कवरेज
बढ़ाने की कोशिश करें। अगर आप चाहें तो एक नई
टर्म पॉलिसी भी ले सकते हैं।
अपने टैक्स और इसके फायदे के बारे में जाने
जैसा कि ऊपर बताया गया है कि शादी के बाद
जवाबदेही में अच्छी खासी
बढ़ोतरी हो जाती है। इन जिम्मेदारियों में
रहने के लिए बड़े घर से लेकर, एक अच्छी कार और
मेडिकल के खर्चे शामिल हैं। भारतीय कर विभाग के
अपने कुछ नियमों का पालन कर आप अपने टैक्स में बचत कर
सकते हैं। हाउसिंग लोन के ब्याज और मूलधन चुकाने पर, इंश्योरेंस
पॉलिसी के प्रीमियम चुकाने पर और
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट आदि के जरिए टैक्स के मद में एक
अच्छी रकम की बचत की जा
सकती है। नवविवाहिता जोड़ों को किसी
आयकर विशेषज्ञ से संपर्क कर इस बात की
जानकारी लेनी चाहिए कि कैसे और कहां-
कहां टैक्स की बचत की जा
सकती है।
कागजात को हमेशा अपडेट रखें
सबसे पहले आपको अपने पुराने कागजात को अपडेट करने
की कोशिश करनी चाहिए, खासकर महिलाओं
के लिए यह जरूरी है, क्योंकि अक्सर शादी
के बाद उनका सरनेम बदल जाता है। शादी के बाद
आपका सरनेम बदल सकता है और पता तो बदलेगा ही,
इसलिए पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, बैंक खाता आदि
में बदलाव के लिए आवेदन करना होगा। पति-पत्नी दोनों
के लिए यह जरूरी है कि पहले से जो निवेश या
बीमा पॉलिसी किए हैं उनके
नॉमिनी के नाम में बदलाव के लिए आवेदन करें।
आपातकालीन निधि बनाएं
जीवन में आने वाली दुर्घटनाएं न तो
अलार्म बजाकर आती हैंऔर न ही
आपके बजट को देखकर। ऐसे समय में आपके लिए इन पर किए
जाने वाले खर्चों को मैनेज कर पाना काफी मुश्किल होता
है। शादी से पहले या बाद में ऐसे मामलों से निपटने के
लिए प्लान बी बनाकर रखना चाहिए। यह आपके
वित्तीय दर्द को कुछ हद तक कम करने में सहायक
होगा। आपको अपनी कुल निवेश राशि के 25
फीसदी हिस्से का एक
आपातकालीन निधि तैयार करना चाहिए और उसे बैंक में
एफडी के रूप में रखना चाहिए। इसके अलावा कम से
कम तीन महीने का खर्च
किसी बचत खाते या लिक्विड फंड में भी
रखना चाहिए।
गुड मनीइंग के फाउंडर और
सीएफपी मणिकरन सिंघल के मुताबिक अगर
आप जॉब कर रहे हों और शादी करने जा रहे हों तो
इसके लिए आपको पहले से पैसे जमा करने चाहिए।
शादी के बाद कहीं हनीमून
मनाने का इरादा है तो इसके लिए पहले से पैसा इक_ा कर लें,
नहीं तो शादी में बेतहाशा खर्च के बाद
आपको कर्ज लेना पड़ सकता है। कर्ज लेना पड़े तो
ऐसी स्थिति में आप भूल कर भी पर्सनल
लोन नहीं लें। शादी के कितने साल बाद
आपको बच्चे चाहिए इसके लिए योजना बनाएं और
उसकी पढ़ाई के शुरूआती खर्च के लिए
भी पैसे जमा करना पहले से ही
जारी रखें। अगर आपके ऊपर कोई निर्भर
नहीं है तो आपको इंश्योरेंश लेने की कोई
जरूरत नहीं है। लेकिन आप एक्सिडेंटल और हेल्थ
पॉलिसी ले सकते हैं।
सिंघल के मुताबिक अगर पति या पत्नी वर्किंग हो ऐसे
में आप उन्हें भी हेल्थ पॉलिसी में शामिल
कर लें। शादी के दौरान मिलने वाले गिफ्ट टैक्स
फ्री होते हैं, इसलिए इस तरह के गिफ्ट में अगर
नकद मिले हैं तो पैसों का टैक्स के लिहाज से एक हिसाब बना कर
रखें। इसका आपके लिए ज्वाइंट लोन मिलने की
सीमा बढ़ जाएगी। फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट को
अपने पार्टनर के साथ शेयर तो करना चाहिए, इसके अलावा वह
कहां रखा है, इसकी जानकारी
भी होना चाहिए।
बच्चा होने के बाद वर्किंग वाइफ को जॉब छोडऩी
होगी। ऐसे में खर्च बढ़ेगा, लेकिन आमदनी
में गिरावट आएगी। इससे निपटने के लिए पहले से
ही पैसे जमा करना शुरू कर दें। इस दौरान घर लेना हो तो
किसी होम लोन प्लानर से मिल कर सारी
जानकारी शेयर करें, उसके बाद ही घर
खरीदने के फैसले पर अंतिम निर्णय लें। पति-
पत्नी के वर्किंग होने के बावजूद घर
अपनी जरूरत के हिसाब से ही खरिदें|

01/02/2016

आसानी से अच्छे दिन तो नहीं
आने वाले

इस बार चुनाव परिणाम आने के बाद जनवरी 2008 वाले हालात हुए तो देसी निवेशक ऐसा
भागेंगे कि फिर बरसों ये भरोसा वापस लाने में लग जाएगा। इसलिए शेयर
बाजार से मिल रहे अच्छे दिनों के संकेतों पर सावधानी
बरतने की जरूरत है। नई सरकार के सामने
बड़ी चुनौतियां होंगी फिर चाहे वो अच्छे दिन
लाने का दावा करने वाले नरेंद्र मोदी हों या कोई और?
लालच से बचने की जरूरत है वरना सरकार कोई
भी आए लालच अच्छे दिनों को बुरे दिनों में बदल
देगी। हालांकि कुछ अच्छे काम किए जाएं तो अच्छे दिन
लाने मुश्किल भी नहीं...
छ: साल से भी ज्यादा समय के बाद शेयर बाजार में इस
तरह की तेजी देखने को मिली
है। पिछले चार-पांच सालों से इक्कीस हजार पर अटका
सेंसेक्स पिछले दिनों तेईस हजार के पार चला गया। हालांकि तेईस
हजार के ऊपर बंद होने में सेंसेक्स कामयाब नहीं
हुआ लेकिनए सेंसेक्स करीब तेईस हजार पर बंद
हुआ, ये जरुर कहा जा सकता है। एक दिन में साढ़े छ: सौ प्वाइंट
से ज्यादा सेंसेक्स चढ़ गया। लेकिन क्या ये तेजी
निवेशकों के लिए पुराने अच्छे दिन लौटाने वाली है। अगर
शेयर बाजार के अनुमान की मानें तो भारतीय
जनता पार्टी के चुनावी नारे अच्छे दिन आने
वाले हैं की तर्ज पर बाजार के भी अच्छे
दिन आने वाले हैं।
अब इस बाजार के अनुमान को मानें तो नरेंद्र मोदी
की अगुवाई वाली सरकार बनने
वाली है। और जो बाजार अभी तक अकेले
भारतीय जनता पार्टी के 200 के अंदर
रहने और मुश्किल से एनडीए बनाकर सरकार
की उम्मीद में था। वो बाजार अचानक
अकेले भारतीय जनता पार्टी के
ही 210-240 सीटों के जीतने
का अनुमान लगा रहा है और इसी आधार पर
आसानी से नरेंद्र मोदी की
अगुवाई में सरकार बनने की उम्मीद
भी कर रहा है। मई महीने के दूसरे
हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन जब दुनिया
से किसी तरह का कोई संकेत नहीं था।
सिर्फ इसी एक संकेत कि नरेंद्र मोदी मजे
से सरकार बना लेंगे, भारतीय शेयर बाजार ने वह छलांग
लगा दी जिसका ट्रेडर व ब्रोकर लंबे समय से इंतजार
कर रहे थे। बाजार को अनुमान ये है कि नरेंद्र मोदी
की सरकार बनेगी और ढेर सारे वो रुके हुए
फैसले ले लिए जाएंगे जिसके न लागू होने की वजह से
दुनिया की रेटिंग एजेंसियां भारत में निवेश को जोखिम बताने
लगी थीं। बाजार को उम्मीद है
कि मोदी ऐसे फैसले लेंगे जिससे भारत के
कारोबारी देश में तेजी से औद्योगिक गतिविधि
बढ़ा सकेंगे।
बुनियादी परियोजनाओं के पूरा होने में कोई रुकावट
नहीं आएगी। यूपीए दो के
दौरान सरकार पर जो लगातार पॉलिसी पैरालिसिस का आरोप
लगता था वो खत्म हो जाएगा। बाजार इसी आधार पर दौड़
लगा चुका है। बाजार में ये सब कुछ हुआ है मई
महीने के दूसरे हफ्ते में और मई महीने
के तीसरे हफ्ते यानी 16 मई को यह तय
हो जाएगा कि बाजार की उम्मीदें
कितनी पूरी होंगी। मतलब
नरेंद्र मोदी आसानी से सरकार बना पाएंगे या
नहीं।
कैसे होंगे अच्छे दिन
चलिए एक बार मान लेते हैं कि 16 मई को जब ईवीएम
खोले जाएंगे तो ढेर सारे कमल निशानों के साथ नरेंद्र मोदी
सरकार बनाने के लिए रायसीना हिल्स की
ओर बढ़ जाएंगे। ये भी मान लेते हैं कि नरेंद्र
मोदी की भारतीय जनता
पार्टी को अकेले 230-240 और बची
सीटें आसानी से एनडीए के
साथ पूरी हो जाएंगी। नरेंद्र
मोदी की वो सरकार बन जाएगी।
जो ये कह रही है कि अच्छे दिन आने वाले हैं। अब
जरा ये बात कर लें कि अच्छे दिन आने का मतलब क्या? मोटा-मोटा
पांच बातें अगर हो जाएं तो मुझे लगता है कि देश के लोग ये मानने
लगेंगे कि अच्छे दिन आ गए हैं। सबसे पहले महंगाई कम हो
जाए।
महंगाई मतलब, सब्जी, अनाज और दूसरी
रोज की खाने-पीने चीजें उन्हें
सस्ती मिलें। फिर क्या उद्योगों को भरोसा लौटे और वो
देश में आसानी से अपने उद्योग लगा चला सकें। फिर
क्या कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर अच्छा करने लगे।
मतलब कारें, एसी, फ्रिज खूब बिकें और क्या हो वो ये
कि लोगों को सस्ता कर्ज मिले। सस्ती ब्याज दरों पर
घर, गाड़ी खरीद सकेें। बुनियादी
सुविधाएं यानी सडक़, बिजली,
पानी की सहूलियत आसानी से
मिल सके। और इस सबके लिए सबसे जरूरी कि ढेर सारे
रोजगार के मौके बनें।जिससे लोगों की कमाई बढ़े और वो
इस तरह से खर्च कर सके, बचा सके कि देश की
तरक्की की रफ्तार यानी
जीडीपी के आंकड़े दुरुस्त हो
सकें।
अच्छे दिनों के लिए क्या हैं चुनौतियां
अच्छी बात ये है कि यूपीए दो
की सरकार सारी आलोचनाओं के बाद अपने
पीछे अच्छा विदेशी मुद्रा भंडार खजाने को
छोडक़र जा रही है। लेकिन दूसरी ओर देश
की ऐसी समस्याएं और गंभीर
हुई दिख रही हैं जिसको आधार बनाकर नरेंद्र
मोदी कह रहे हैं कि उनकी सरकार बनाइए
तो अच्छे दिए आएंगे। सबसे ज्यादा चोट पड़ी है तो
भारतीयों पर महंगाई की। महंगाई का
आलम ये रहा है कि पिछले तीन सालों से हर बार जब
महीने का सामान खरीदने के लिए
भारतीय निकलता है तो उसे पहले से ज्यादा रकम
चुकानी पड़ी है।
रोज की जरूरत के सामान तेजी से महंगे
हुए हैं। आटा, दाल, चावल, सब्जी, दूध और
दूसरी सारी जरूरी
चीजें तेजी से महंगी हुई हैं।
हर तीसरे महीने अखबारों में विज्ञापन
देकर दूध कंपनियां दूध के दाम एक-दो रुपया बढ़ाने के तर्क पेश
करती हैं। और सबसे बड़ी बात ये
रही है कि यूपीए एक हो या दो, दोनों
ही कार्यकाल में देश में मॉनसून बेहतर रहा है और
खाद्यान्न के मामले में भारत की स्थिति बहुत
अच्छी रही है। इसके बावजूद सरकार
अनाज, फल, सब्जी, दूध की
कीमत काबू में नहीं कर
सकी। और प्याज की कीमतों
पर तो कोहराम मचा। अब सवाल ये है कि नरेंद्र मोदी
इस मोर्चे पर क्या आसानी से काबू पा लेंगे। तो इसका
जवाब नहीं में हैं।
अभी क्या हैं हालात
अभी तक जो मौसम का हाल रहा है वो साफ दिखा रहा
है कि इस साल मॉनसून सामान्य से कम हो सकता है जिसका
सीधा सा मतलब होगा कि खेती पर बुरा
असर पड़ेगा। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की हालत का
अंदाजा लगाइए कि ताजा कारों की बिक्री का
आंकड़ा बढऩे के बजाए करीब दस प्रतिशत कम बता
रहा है। मतलब लोगों की जेब में कारें
खरीदने के पैसे नहीं हैं। वो
भी तब जब दुनिया की हर कार
कंपनी भारतीयों को लुभाने के लिए ढेर सारे
नए मॉडल हर महीने ला रही है।
देश में महंगे कर्ज की वजह से औद्योगिक घरानों को
अपनी विस्तार योजना रोकनी
पड़ी है। इससे देसी निवेश बुरी
तरह प्रभावित हुआ है। घर खरीदने के लिए ग्यारह
प्रतिशत के आसपास और गाड़ी खरीदने के
लिए लोगों को साढ़े बारह प्रतिशत से ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है।
इसकी वजह से रियल एस्टेट सेक्टर में जबर्दस्त
ठहराव आ गया है। दिल्ली, मुंबई के बाजार में साल भर
पहले के भाव अभी भी थोड़ा खोजने पर
मिल जा रहे हैं। डेवलपर भी फंड की
वजह से अपने चल रहे प्रोजेक्ट को पूरा नहीं कर पा
रहे हैं और नए प्रोजेक्ट शुरु ही नहीं
कर पा रहे हैं। अब रियल एस्टेट सेक्टर को उम्मीद
है कि नरेंद्र मोदी आएंगे तो इस सेक्टर में
तेजी आएगी लेकिन सबसे बड़ा सवाल
यही है कि जिस तरह की
नीतियां भारत सरकार की रियल एस्टेट
सेक्टर के लिए उसमें डर यही है कि 16 मई के बाद
की रियल एस्टेट की तेजी
सिर्फ बुलबुला होगी, काला धन बढ़ाने वाली
होगी। वो फायदा करेगी तो रियल एस्टेट
डेवलपर्स का।
उससे देश की
जीडीपी में खास
बेहतरी नहीं होने वाली।
जीडीपी की
बेहतरी की चिंता इसलिए कि
जीडीपी ग्रोथ यानी
तरक्की की रफ्तार इस समय दशक में
सबसे कम यानी साढ़े पांच प्रतिशत की है।
और इस वित्तीय वर्ष में भी
इसी के आसपास ये रफ्तार रहती दिख
रही है। क्योंकि जब तक अगली सरकार
चाहे वो मोदी की हो या किसी
और की, काम शुरू कर पाएगी तब तक इस
वित्तीय वर्ष की पहली
तिमाही बीत चुकी
होगी और दूसरी तिमाही का
आधार भी बन चुका होगा। ऐसे में इस
तरक्की की रफ्तार को चमत्कारिक
तरीके से बढ़ाना नरेंद्र मोदी या
अगली किसी भी सरकार के
लिए चुनौती होगी।
क्या कहते हैं शेयर बाजार के संकेत
बात हमने शेयर बाजार के संकतों से शुरू की
थी। इसलिए शेयर बाजार की
ही बात फिर से कर लेते हैं और उसके संकेतों को
भी ज्यादा गंभीरता से समझने
की कोशिश करते हैं। मई के दूसरे हफ्ते में शेयर
बाजार में ये जो तेजी देखने को मिली है ये
पूरी तरह से उन विदेशी खिलाडिय़ों
की वजह से है जो एक झटके में अपनी
सारी रकम निकालकर किसी दूसरे अच्छे
मुनाफा देने वाले ठिकाने की ओर चल देते हैं।
यानी 2008 की ही तरह
तेजी से विदेशी निवेशक मुनाफा लेकर भागने
लगे तो सेंटिमेंट पर चलने वाले बाजार को बचाना बड़ा मुश्किल होगा।
शेयर बाजार की तेजी में जो शेयर
सबसे तेजी से भागे हैं
उनमें बैंक, पावर और रियल एस्टेट सबसे आगे हैं। हालांकि
अच्छी बात ये है कि मई के दूसरे हफ्ते में आई इस
तेजी के नेता वो शेयर हैं जिनके फंडामेेंटल्स
काफी अच्छे हैं और वो लंबे समय से बाजार में आई
कमजोरी की वजह से पिट रहे थे। लेकिन
इसी का दूसरा पहलू ये भी है कि शेयर
बाजार की इस तेजी में नब्बे प्रतिशत से
ज्यादा कंपनियां शामिल नहीं हैं और न ही
देसी निवेशक इस तेजी का हिस्सा है।
शेयर बाजार में भारतीय देसी निवेशकों को
रुचि भी कितनी तेजी से खत्म
हुई है इसका अंदाजा लगाने के लिए एक आंकड़ा काफी
होगा। इस साल के पहले महीने से मार्च
महीने में देसी निवेशकों यानी
एनएसडीएल के जरिए ट्रेडिंग अकाउंट खुलवाने वाले
करीब आधा प्रतिशत घटे हैं। डर ये कि अगर इस बार
16 मई के बाद 2008 जनवरी वाले हालात हुए तो
देसी निवेशक ऐसा भागेंगे कि फिर बरसों ये भरोसा वापस
लाने में लग जाएगा।
इसलिए शेयर बाजार से मिल रहे अच्छे दिन के संकेतों पर
सावधानी बरतने की जरूरत है। नई सरकार
के सामने बड़ी चुनौतियां होंगी फिर चाहे वो
अच्छे दिन लाने का दावा करने वाले नरेंद्र मोदी
ही क्यों न हों। लालच से बचने की जरूरत
है वरना सरकार कोई भी आए लालच अच्छे दिनों को बुरे
दिन में बदल देगा। और भारतीय लोकतंत्र है
ही पूरी तरह अनिश्चित। 99 प्रतिशत
मोदी की अच्छे दिन वाली
सरकार के साथ एक प्रतिशत दूसरी सरकार
भी मानें तो देश की भावनाएं जिस तरह से
कमजोर होंगी उन्हें उबारना बहुत बड़ी
चुनौती होगी।

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