01/02/2016
कड़वा सच
शादी के पहले और शादी के बाद
शादी को इस ब्रह्मांड में सबसे मजूबत बंधन माना जाता
है। यह केवल दो आत्माओं का मिलन ही
नहीं है, बल्कि दो संस्कृतियों को जोडऩे का काम करता
है। यह दो अलग-अलग परिवारों को कभी न टूटने वाले
बंधन में हमेशा के लिए खुशियां और जिम्मेदारियों के लिए बांधता है।
शादी करना किसी के भी
जीवन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय होता है। लेकिन
शादी के बाद जहां एक रोमानी दुनिया शुरू
होती है, वहीं वित्तीय मामले
में हकीकत काफी बदल जाती
है। जो लोग शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं, उनके
लिए यहां हम कुछ जानकारियां दे रहे हैं कि वे किस तरह से
अपनी वित्तीय जिम्मेदारियों को निभाएं ताकि
आगे चलकर दिक्कत पेश न हो।
शादी से पहले किन बातों पर करें गौर
शादी के पहले कोई खास जिम्मेदारी
नहीं होती इसलिए लोग बचत, निवेश,
बीमा आदि के मामले में बहुत जिम्मेदारी से
काम नहीं करते। लेकिन शादी के बाद तो
एक व्यवस्थित जीवन बिताना जरूरी हो
जाता है, इसलिए अगर आप शादी करने जा रहे हैं तो
सिर्फ रोमांस की रोमानी दुनिया से थोड़ा
वित्तीय मामलों की
जमीनी दुनिया पर भी गौर कर
लें।
पता करें कि पार्टनर के ऊपर कोई कर्ज तो नहीं
अपने मंगेतर से पूछें कि उसके सिर पर किसी तरह का
कर्ज तो नहीं है और यदि है तो कितना है?
शादी से पहले यदि कॉफी टेबल पर मुलाकात
होती है तो वहीं पर अपनी
बचत, निवेश और कर्ज के आंकड़ों का आदान-प्रदान करना बेहतर
रहेगा। इस बारे में बात करें कि एक-दूसरे के सिर से कर्ज का बोझ
कैसे हटाया जा सकता है, इस बारे में भी चर्चा कर लें
कि आगे कर्ज कैसे निपटाएंगे, संयुक्त रूप से या अलग-अलग।
क्या आपने कोई निवेश किया है
यदि आप दोनों ने या किसी एक ने कोई निवेश किया है तो
शादी के बाद उनको किस तरह से हैंडल किया जाएगा।
क्या शादी के बाद आप इसे संयुक्त रूप से चलाना
चाहते हैं, अगर हां तो इसकी जानकारी
करिए कि इसकी प्रक्रिया क्या होती है।
क्या इससे टैक्स के लिहाज से कोई फायदा होगा। यह
भी ध्यान रखना होगा कि आपको किस तरह से बढिय़ा
रिटर्न मिल सकता है।
शादी के बाद कहां रहना है
शादी से पहले आपको अपने मंगेतर से इस बारे में
भी चर्चा कर लेनी चाहिए कि
शादी के बाद आप दोनों को कहां रहना है, खासकर यदि
आप संयुक्त परिवार में नहीं बल्कि अकेले रहते हों।
इसका मतलब इस बात पर राय-मशविरा करना है कि आप दोनों कितने
तक का मकान किराए पर ले सकते हैं। ध्यान रहे कि मकान का
किराया या यदि मकान खरीद रहे हैं तो
उसकी ईएमआई आप दोनों के कुल मासिक आय के
करीब 25 से 30 फीसदी तक
ही हो।
शादी के बाद की कैसे निभाएं जिम्मेदारियां
शादी के बाद आपकी जोखिम लेने
की क्षमता कम हो जाएगी और आपको
कुछ वित्तीय स्थिरता की भी
जरूरत होगी। शादी के बाद कोई
भी प्लानिंग करने से पहले आपको अपने पार्टनर के
साथ अच्छी तरह विचार-विमर्श करना बहुत
जरूरी है। इससे आपको इस बात का सही
अंदाजा लग जाएगा कि आप दोनों की कुल आय और
खर्च कितना है। उदाहरण के लिए यदि आपकी नियमित
आय नहीं है और पति या पत्नी
की नियमित आय है तो आपको अपने सभी
ईएमआई के भुगतान के लिए ज्वाइंट एकाउंट खोलना चाहिए। आपको
इसकी जानकारी होनी चाहिए कि
बैंक एकाउंट शेयर कैसे किया जा सकता है और संयुक्त
तरीके से बिल का भुगतान किस तरह से हो सकता है।
बहुत से लोग तीन बैंक एकाउंट रखते हैं, एक ज्वाइंट
एकाउंट और दो अपने-अपने अलग एकाउंट।
जिम्मेदारियों को साझा करें
आम तौर पर हमारे समाज में लोगों का यह कहना है कि
शादी का दूसरा नाम जिम्मेदारी है और यह
बिल्कुल सत्य भी है। शादी के बाद जोड़े
एक दूसरे के प्रति उत्तरदायी होते हैं और इन
जिम्मेदारियों का वहन साथ मिलकर करते हैं। चाहे वह
वित्तीय मामला हो या फिर कोई पारिवारिक मसला, हमेशा
से यह बुद्धिमानी भरा कदम होता है कि इनको कैसे
साथ मिलकर निपटाया जाए। जिम्मेदारियों को साझा करने का फायदा यह
होता है कि आपके पास अपने वित्तीय खर्चों के ट्रैक
रिकॉर्ड के साथ पार्टनर के खर्चों का ब्योरा भी
आसानी से उपलब्ध रहता है। इससे विवाहित जोड़े को
इस बात का पता बड़े सहज रूप से पता चल जाता है कि उनके लिए
क्या अच्छा है। इससे वित्तीय मामलों पर नियंत्रण
करना काफी आसान हो जाता है।
वित्तीय मामलों से जुड़ी कोई
भी जानकारी एक-दूसरे से
नहीं छुपाएं
कुछ बातों को अपने पार्टनर से छुपाना सही हो सकता
है लेकिन बात जब शादी के बाद के वित्तीय
मामलों से जुड़ा हो तो ऐसा कभी नहीं होना
चाहिए। विवाहित जोड़े को वित्तीय मामलों से जुड़े
सभी मसलों पर आपस में खुलकर बातचीत
करनी चाहिए। ऐसा करने से चीजें आसान
हो जाती हैं। कभी ऐसा समय आता है
जब एक पार्टनर के लिए अपनी वित्तीय
जरूरतों को पूरा करना काफी चुनौती भरा होता
है वैसे में दूसरा पार्टनर उसे आसानी से मैनेज कर लेता
है। किसी अनहोनी को रोकने के लिए अपने
पार्टनर से हरेक वित्तीय आदतों को साझा करना उतना
ही महत्वपूर्ण होता है।
उचित बजट बनाएं
किसी भी चीज में उचित बजट
नहीं होने से इसका व्यक्ति के निवेश औऱ बचत पर
लगातार असर पडऩा लाजिमी है। यह बात बिल्कुल
सही है कि एक बार अगर यह सिलसिला शुरू हो गया तो
गृहस्थी की गाड़ी को दोबारा
पटरी पर लाना बहुत ही मुश्किल होता है।
सबसे खराब परिदृश्य में कभी-कभी अंत
में यह आपको दिवालियापन की ओर लेकर जा सकता
है। आय और निवेश के आधार पर बजट बनाने का फायदा यह होता
है कि पार्टनर अपने को वित्तीय रूप से टूटने से बचा
सकने में सक्षम होते हैं। इससे चीजें उनके लिए
आसान भी हो जाती हैं। पूरी
अच्छी तरह से बजट तैयार किए जाने पर
आपकी आय में बढ़ोतरी भले
ही नहीं हो पाए लेकिन इतना तो तय है कि
आपकी सेविंग में बढ़ोतरी जरूर हो
जाएगी।
जिम्मेदारियों का बंटवारा करें
कभी कभी ऐसा भी होता है
दायित्वों का उचित बंटवारा नहीं होने से सही
बजट बनने के बाद भी इसके फेल होने के चांस रहते
हैं। केवल किसी स्कीम को लेकर किए गए
प्लानिंग और विचारों का लेनदेन ही किसी
जोड़े के लिए मजबूत वित्तीय आधार नहीं
हो सकते हैं। दायित्वों का बंटवारा पार्टनर के बीच उचित
तरीके से होना चाहिए। उदाहरण के लिए, किचेन के
सामान लाने और उसे व्यवस्थित रखने की
जिम्मेदारी पत्नी को दी जा
सकती है, वहीं घर के दूसरे मासिक बिलों
के भुगतान आदि की जिम्मेदारी पति संभाल
सकता है। ऐसा करने से विवाहित जोड़े के लिए काम
काफी आसान हो जाता है और समय की
बचत हो जाती है।
उचित इंश्योरेंस कवर जरुर लें
शादी के बाद कई तरह की जिम्मेदारियां
आती हैं। इसलिए आपको बीमा कवर बढ़ाना
चाहिए। यदि आपके पास व्यक्तिगत हेल्थ इंश्योरेंस कवर है तो
उसे फेमिली फ्लोटर प्लान में बदलना चाहिए। अधिकतर
मामलों में ऐसा देखा गया है कि अविवाहित लोग इंश्योरेंस कवर
नहीं लेते हैं। ऐसा उत्तरदायित्व नहीं होने
की वजह से होता है। लेकिन परिस्थितियों में बदलाव
शादी के बाद जल्दी से होता है क्योंकि
आप अब एक से दो हो गए हैं। शादी से पहले
व्यक्तिगत तौर पर लोग मस्ती की
जिंदगी बिताने में यकीन करते हैं लेकिन
शादी के बाद यह तरीका बिल्कुल काम
नहीं करता है। शादी के बाद आपको अपने
इंश्योरेंस कवरेज के बारे में जांच करनी चाहिए और
अगर लगता है कि यह बहुत कम है तो तत्काल अपना कवरेज
बढ़ाने की कोशिश करें। अगर आप चाहें तो एक नई
टर्म पॉलिसी भी ले सकते हैं।
अपने टैक्स और इसके फायदे के बारे में जाने
जैसा कि ऊपर बताया गया है कि शादी के बाद
जवाबदेही में अच्छी खासी
बढ़ोतरी हो जाती है। इन जिम्मेदारियों में
रहने के लिए बड़े घर से लेकर, एक अच्छी कार और
मेडिकल के खर्चे शामिल हैं। भारतीय कर विभाग के
अपने कुछ नियमों का पालन कर आप अपने टैक्स में बचत कर
सकते हैं। हाउसिंग लोन के ब्याज और मूलधन चुकाने पर, इंश्योरेंस
पॉलिसी के प्रीमियम चुकाने पर और
नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट आदि के जरिए टैक्स के मद में एक
अच्छी रकम की बचत की जा
सकती है। नवविवाहिता जोड़ों को किसी
आयकर विशेषज्ञ से संपर्क कर इस बात की
जानकारी लेनी चाहिए कि कैसे और कहां-
कहां टैक्स की बचत की जा
सकती है।
कागजात को हमेशा अपडेट रखें
सबसे पहले आपको अपने पुराने कागजात को अपडेट करने
की कोशिश करनी चाहिए, खासकर महिलाओं
के लिए यह जरूरी है, क्योंकि अक्सर शादी
के बाद उनका सरनेम बदल जाता है। शादी के बाद
आपका सरनेम बदल सकता है और पता तो बदलेगा ही,
इसलिए पैन कार्ड, वोटर आईडी कार्ड, बैंक खाता आदि
में बदलाव के लिए आवेदन करना होगा। पति-पत्नी दोनों
के लिए यह जरूरी है कि पहले से जो निवेश या
बीमा पॉलिसी किए हैं उनके
नॉमिनी के नाम में बदलाव के लिए आवेदन करें।
आपातकालीन निधि बनाएं
जीवन में आने वाली दुर्घटनाएं न तो
अलार्म बजाकर आती हैंऔर न ही
आपके बजट को देखकर। ऐसे समय में आपके लिए इन पर किए
जाने वाले खर्चों को मैनेज कर पाना काफी मुश्किल होता
है। शादी से पहले या बाद में ऐसे मामलों से निपटने के
लिए प्लान बी बनाकर रखना चाहिए। यह आपके
वित्तीय दर्द को कुछ हद तक कम करने में सहायक
होगा। आपको अपनी कुल निवेश राशि के 25
फीसदी हिस्से का एक
आपातकालीन निधि तैयार करना चाहिए और उसे बैंक में
एफडी के रूप में रखना चाहिए। इसके अलावा कम से
कम तीन महीने का खर्च
किसी बचत खाते या लिक्विड फंड में भी
रखना चाहिए।
गुड मनीइंग के फाउंडर और
सीएफपी मणिकरन सिंघल के मुताबिक अगर
आप जॉब कर रहे हों और शादी करने जा रहे हों तो
इसके लिए आपको पहले से पैसे जमा करने चाहिए।
शादी के बाद कहीं हनीमून
मनाने का इरादा है तो इसके लिए पहले से पैसा इक_ा कर लें,
नहीं तो शादी में बेतहाशा खर्च के बाद
आपको कर्ज लेना पड़ सकता है। कर्ज लेना पड़े तो
ऐसी स्थिति में आप भूल कर भी पर्सनल
लोन नहीं लें। शादी के कितने साल बाद
आपको बच्चे चाहिए इसके लिए योजना बनाएं और
उसकी पढ़ाई के शुरूआती खर्च के लिए
भी पैसे जमा करना पहले से ही
जारी रखें। अगर आपके ऊपर कोई निर्भर
नहीं है तो आपको इंश्योरेंश लेने की कोई
जरूरत नहीं है। लेकिन आप एक्सिडेंटल और हेल्थ
पॉलिसी ले सकते हैं।
सिंघल के मुताबिक अगर पति या पत्नी वर्किंग हो ऐसे
में आप उन्हें भी हेल्थ पॉलिसी में शामिल
कर लें। शादी के दौरान मिलने वाले गिफ्ट टैक्स
फ्री होते हैं, इसलिए इस तरह के गिफ्ट में अगर
नकद मिले हैं तो पैसों का टैक्स के लिहाज से एक हिसाब बना कर
रखें। इसका आपके लिए ज्वाइंट लोन मिलने की
सीमा बढ़ जाएगी। फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट को
अपने पार्टनर के साथ शेयर तो करना चाहिए, इसके अलावा वह
कहां रखा है, इसकी जानकारी
भी होना चाहिए।
बच्चा होने के बाद वर्किंग वाइफ को जॉब छोडऩी
होगी। ऐसे में खर्च बढ़ेगा, लेकिन आमदनी
में गिरावट आएगी। इससे निपटने के लिए पहले से
ही पैसे जमा करना शुरू कर दें। इस दौरान घर लेना हो तो
किसी होम लोन प्लानर से मिल कर सारी
जानकारी शेयर करें, उसके बाद ही घर
खरीदने के फैसले पर अंतिम निर्णय लें। पति-
पत्नी के वर्किंग होने के बावजूद घर
अपनी जरूरत के हिसाब से ही खरिदें|