18/10/2026
मेरे दो दोस्त हैं। एक ₹1,80,000 महीना कमाता है, दूसरा ₹65,000। पिछले महीने दोनों से बात हुई, और पता चला बैंक बैलेंस किसका ज़्यादा है।
अमित मल्टीनेशनल में मैनेजर है। गाड़ी बड़ी, घर बड़ा, बच्चे महँगे स्कूल में। बाहर से देखो तो साफ़ लगता है कि वही आगे है।
सुरेश छोटी कंपनी में है। वही पुरानी गाड़ी, किराए का घर, बच्चे पास के स्कूल में।
फ़र्क़ सिर्फ़ एक था।
अमित हर महीने जो बचता था, वो बचाता था।
सुरेश हर महीने पहले बचाता था, फिर बची हुई रक़म में घर चलाता था। सैलरी आते ही 20% सीधे निकल जाता था — उसे हाथ लगाने का मौक़ा ही नहीं मिलता था।
दस साल बाद अमित के पास EMI हैं। सुरेश के पास पैसा है।
ये बात बहुत देर से समझ आई — कि पैसा बनाने का गणित इस पर नहीं टिका कि आप कितना कमाते हैं, बल्कि इस पर कि आप कितना अपने पास रोक पाते हैं।