06/11/2019
RCEP कितना अच्छा कितना बुरा
ये बात तो तय है कि RCEP में भारत के शामिल होने से हमारे किसानों, लघु उद्योगों, को भारी नुकसान उठाना पड़ता। एक ओर जहां चीन से सस्ते माल के डंपिंग का खतरा था ,वहीं ऑस्ट्रेलिया से सस्ते कृषि उत्पाद और न्यूजीलैंड से सस्ते दुग्ध उत्पाद आने का खतरा था। वहीं कहीं ना कहीं हमारे प्रधानमंत्री के 'मेक इन इंडिया ' को भी नुकसान होता।ऐसी और भी कई समस्याएं थी जो हमारी अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती, अतः ये बात काफी सही है कि प्रधानमंत्री ने वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए सही निर्णय लिया।
मगर हम सबको ये भी सोचना होगा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी हमारे कृषि और लघु उद्योग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धा नहीं कर पा रहे, कहीं ना कहीं इसके लिए हम सब जिम्मेदार है।
यदि आज हमने अपना नुकसान बचाया है तो भविष्य का फायदा भी गवाया है, इन पंद्रह देशों में हम भी व्यापार करते, सेवा क्षेत्र में रोजगार बढ़ता जिससे हमारे सतत विकास में वृद्धि होती और हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत होती।
इसके अलावा हमारी विदेश नीति में शामिल एक्ट ईस्ट पॉलिसी और एशिया प्रशांत संगठन को भी काफी नुकसान होगा।
हमे अपने कृषि और लघु उद्योग को इतना मजबूत बनाना होगा कि वे ना केवल वैश्विक प्रतिस्पर्धा का सामना करे बल्कि उसका लाभ भी उठाए।
अमित शंकर श्रीवास्तव
Financial advisor
FDKING wealth creators PVT LTD