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05/06/2021
02/02/2021

देश में इनकम टैक्स का पहला कानून 160 साल पहले आया था। 1860 में अंग्रेज अफसर जेम्स विल्सन ने पहला बजट पेश किया था। इसी में इनकम टैक्स कानून को जोड़ा गया था। देश के पहले बजट में 200 रुपए तक की सालाना कमाई वालों को इनकम टैक्स में छूट दी गई थी। अभी छूट की ये सीमा 2.5 लाख रुपए है। देश में 1961 का आयकर कानून लागू है। इसमें समय-समय पर संशोधन होते रहते हैं।

1860 में 200 रुपए से ज्यादा की कमाई पर टैक्स लगता था
देश के पहले बजट में 200 रुपए से 500 रुपए तक की सालाना आय वालों पर टैक्स का प्रावधान था। सालाना 200 रुपए से ज्यादा कमाने वालों पर 2% और 500 रुपए से ज्यादा कमाने वालों पर 4% टैक्स लगाने का प्रावधान किया गया था। इनकम टैक्स कानून में सेना, नौसेना और पुलिस कर्मचारियों को छूट दी गई थी। हालांकि, उस समय ज्यादातर कर्मचारी अंग्रेज ही थे। सेना के कैप्टन का सालाना वेतन 4,980 रुपए और नौसेना के लेफ्टिनेंट का सालाना वेतन 2,100 रुपए था। हालांकि, इनकम टैक्स के कानून का उस समय कड़ा विरोध हुआ था। उस समय के मद्रास प्रांत के गवर्नर सर चार्ल्स टेवेलियन ने भी विरोध किया था। विल्सन का ये कानून ब्रिटेन के इनकम टैक्स कानून की तरह ही था। ब्रिटेन में 1798 में तत्कालीन प्रधानमंत्री विलियम पिट ने भी सेना का खर्च निकालने के लिए इनकम टैक्स कानून बनाया था।

03/10/2020

अब आप इनकम टैक्स रिटर्न 30 नवंबर, 2020 तक दाखिल कर सकते हैं. कर आकलन वर्ष 2019-20 का टैक्स रिटर्न अब 30 नवंबर, 2020 तक दाखिल किया जा सकता है. केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड यानी CBDT ने कोरावायरस संक्रमण से पैदा दिक्कतों की वजह से इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने की डेडलाइन 30 नवंबर, 2020 तक बढ़ा दी है. इससे पहले इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की डेडलाइन 30 सितंबर तक थी.

इससे पहले सरकार ने टैक्स आकलन वर्ष 2018-19 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न की तारीख बढ़ा कर 31 मार्च 2020 कर दी थी. इसे बाद में बढ़ा कर 30 जून 2020 कर दिया गया था. फिर यह तारीख 31 जुलाई, 2020 की गई. टैक्स आकलन वर्ष 2019-20 के लिए आईटीआर दाखिल करने की डेडलाइन 30 सितंबर 2020 रखी गई थी. अब आयकर विभाग ने इसकी तारीख 30 नवंबर कर दी है.

टैक्स छूट क्लेम न कर पाने या इनकम के बारे में जानकारी या बैंक अकाउंट की जानकारी देने में गलती होने पर रिवाइज्ड रिटर्न भरा जाता है. वहीं देरी से इनकम टैक्स रिटर्न आईटीआर इनकम टैक्स एक्ट, 1961 के सेक्शन 139 4 के तहत भरा जाता है.
कोरोनावायरस संक्रमण की वजह से बढ़ी डेडलाइन

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने कहा है कि कोरोनावायरस संक्रमण की दिक्कतों को देखते हुए इनकम टैक्स रिटर्न भरने की तारीख बढ़ाई जा रही है. आने वाले दिनों में विभाग कोशिश करेगा कि ज्यादा से ज्यादा टैक्सपेयर्स अपना रिटर्न भर सकें.

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ज्यादा से ज्यादा टैक्सपेयर्स को रिटर्न भरने के लिए एसएमएस और मेल से संदेश भेज रहा है. इसके साथ ही जिन लोगों ने 2018-19 का रिटर्न नहीं भरा है उन्हें भी रिवाइज्ड रिटर्न भरने के लिए 30 नवंबर तक का समय दिया जा रहा है.

जीएसटी रिटर्न भी अपलोड होगा

इस बीच, सीबीडीटी ने इनकम टैक्स अधिकारियों को फॉर्म 26AS में गुड्स एंड सर्विस टैक्स रिटर्न अपलोड करने की इजाजत दी है. पहली बार इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और जीएसटी डिपार्टमेंट के बीच इस तरह की जानकारी साझा की जा रही है.इनकम टैक्स डिपार्टमेंट जीएसटी अथॉरिटीज से हासिल जानकारी इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के सिस्टम में अपलोड करेगा. यह जानकारी टैक्सपेयर की प्रोफाइल में दिखेगी.

https://youtu.be/fbhky1F36EI
22/04/2020

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24/03/2020

नई दिल्ली: कोरोनावायरस के चलते लॉकडाउन झेल रहे देशवासियों के लिए केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कई राहतों का ऐलान किया, जिनमें आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि को बढ़ाए जाने के अलावा वस्तु एवं सेवा कर (GST) की मार्च, अप्रैल तथा मई, 2020 की रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि, यानी डेडलाइन को भी बढ़ाकर 30 जून कर दिया गया है.
मंगलवार को केंद्रीय राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद निर्मला सीतारमण ने वित्तवर्ष 2018-19 की इनकम टैक्स रिटर्न की डेडलाइन को 30 जून तक बढ़ा दिया. उन्होंने आधार कार्ड को PAN कार्ड से लिंक करने और 'विवाद से विश्वास' स्कीम को भी 30 जून तक बढ़ा दिया है.

इसके अलावा करदाताओं को दी गई अन्य राहतों में स्रोत पर कर कटौती, यानी TDS पर ब्याज को 18 फीसदी से घटाकर 9 फीसदी कर दिया गया है, तथा रिटर्न फाइल करने में देरी होने पर लिए जाने वाले 12 फीसदी चार्ज को भी 9 फीसदी कर दिया गया है.

01/11/2019

देशभर में 1 नवंबर से कई नए बैंकिंग नियम लागू होने वाले हैं। इन बदले हुए नियमों का सीधा असर आपकी जेब पर पड़ने वाला है। 1 नवंबर से स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) ने डिपॉजिट पर ब्याज दरों में बदलाव कर दिया है। इसके अलावा 1 नवंबर से ही ग्राहकों या मर्चेंट से एमडीआर भी नहीं वसूला जाएगा। साथ ही कुछ राज्यों में बैंकों के कामकाज के समय में भी बदलाव हुआ है।
ग्राहक या मर्चेंट्स से MDR नहीं वसूला जाएगा
वित्त मंत्रालय ने पेमेंट के नियमों में बदलाव कर दिया है। यह नियम 50 करोड़ रुपये से ज्यादा के टर्नआउट वाले कारोबारियों पर लागू होगा। इसके तहत कारोबारियों के लिए डिजिटल पेमेंट लेना अनिवार्य कर दिया गया है। हालांकि ग्राहकों या मर्चेंट्स से एमडीआर या किसी तरह का कोई शुल्क नहीं वसूला जाएगा।

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