06/02/2026
मौत ने उसे स्वर्ग भेजा,
और सिस्टम ने परिवार को GST भवन
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⭐ आज की बात — एक मुलाक़ात से
कल एक नवयुवक मेरे पास आया।
आँखों में थकान थी।
आवाज़ में डर।
और शब्दों में उलझन।
उसने कहा —
“सर…
कुछ दिन पहले पापा की death हुई है।
अभी तो बरसी भी नहीं हुई है…
और GST department से उनके नाम का Demand Order आ गया।”
वो रुका।
फिर धीरे से बोला —
“मुझे पापा के business के बारे में कुछ नहीं पता।
ना मैंने कभी वो business संभाला है,
ना आगे संभालने वाला हूँ।
ये GST का झंझट…
इससे मैं कैसे बाहर निकलूँ?”
उस पल मुझे समझ आ गया —
👉 ये समस्या सिर्फ़ उसकी नहीं है।
👉 ये उन सैकड़ों परिवारों की है,
जो किसी अपने को खोने के बाद
सिस्टम की नोटिसों से जूझ रहे हैं।
इसीलिए —
आज का यह ब्लॉग।
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⭐ समस्या कहाँ से शुरू होती है?
अक्सर कहानी एक-सी होती है —
🔥 Sole Proprietor का देहांत
🔥 घर में शोक का माहौल
🔥 लेकिन GST portal पर registration अब भी active
और फिर —
📩 Show Cause Notice
📄 Demand Order
नाम उसी का —
जो अब जवाब देने के लिए
ज़िंदा ही नहीं है।
अब परिवार पूछता है —
❓ जवाब कौन देगा?
❓ सुनवाई कौन अटेंड करेगा?
❓ वसूली किससे होगी?
और यहीं पर department एक लाइन बोल देता है —
“𝗦𝗲𝗰𝘁𝗶𝗼𝗻 𝟵𝟯 𝗮𝗽𝗽𝗹𝗶𝗰𝗮𝗯𝗹𝗲 है।”
लेकिन सवाल यह है —
Section 93 सच में कहता क्या है?
और क्या department जो कर रहा है,
वो कानून के मुताबिक है?
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⭐ 𝗦𝗲𝗰𝘁𝗶𝗼𝗻 𝟵𝟯 — सच और भ्रम
Section 93 यह कहता है कि —
अगर कोई व्यक्ति मर जाता है, और —
1️⃣ जिसने भी business continue किया है,
वही पूरी liability उठाएगा
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2️⃣ अगर business बंद हो गया है,
तो legal heir जिम्मेदार होगा,
लेकिन सिर्फ़ उस estate की सीमा तक,
जो उसे विरासत में मिली है
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यहाँ तक तो बात ठीक है।
लेकिन एक बहुत बड़ी बात अक्सर ignore कर दी जाती है —
👉 𝗦𝗲𝗰𝘁𝗶𝗼𝗻 𝟵𝟯 𝗿𝗲𝗰𝗼𝘃𝗲𝗿𝘆 का 𝘀𝗲𝗰𝘁𝗶𝗼𝗻 है
👉 𝗮𝗱𝗷𝘂𝗱𝗶𝗰𝗮𝘁𝗶𝗼𝗻 या 𝗮𝘀𝘀𝗲𝘀𝘀𝗺𝗲𝗻𝘁 𝗽𝗿𝗼𝗰𝗲𝘀𝘀 का नहीं
यानि —
किससे पैसा recover होगा —
यह Section 93 बताता है।
लेकिन —
❓ किसके खिलाफ notice जाएगा?
❓ किसे सुना जाएगा?
❓ और किसके नाम order बनेगा?
यह अलग और ज़्यादा बुनियादी सवाल है।
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⭐ जब यह सवाल अदालत पहुँचा
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1️⃣ 𝗥𝗮𝗷𝘃𝗮𝗻𝘁𝗶 𝗗𝗲𝘃𝗶 𝘃𝘀 𝗦𝘁𝗮𝘁𝗲 𝗼𝗳 𝗨.𝗣.
Writ Tax No. 142 of 2026
Allahabad High Court | 29.01.2026
यहाँ department ने —
➡️ मरे हुए व्यक्ति के नाम order बना दिया
➡️ और legal representative से recovery की कोशिश की
Court ने साफ़ कहा —
↗️ Section 93 liability की बात करता है
↗️ लेकिन dead person के खिलाफ adjudication की अनुमति नहीं देता
और इसलिए —
🔥 मरे हुए व्यक्ति के नाम SCN या Order — गलत है।
साथ ही Court ने यह भी कहा —
अगर legal representative को liable बनाना है,
तो उसे notice देना और सुनवाई देना
कानून की अनिवार्य शर्त है।
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2️⃣ 𝗕𝗮𝗿𝗮𝘁𝗮𝗺 𝗦𝗮𝘁𝗶𝘀𝗵 𝘃. 𝗝𝗖 𝗼𝗳 𝗖𝗲𝗻𝘁𝗿𝗮𝗹 𝗧𝗮𝘅
Writ Petition No. 6029 of 2025
Andhra Pradesh High Court | 24.12.2025
यहाँ Court ने बात और साफ़ की।
Court ने कहा —
👉 मरे हुए व्यक्ति के खिलाफ department case नहीं चला सकता।
लेकिन —
उसके tax dues को settle करने के लिए
assessment दोबारा किया जा सकता है —
✔️ legal representative को involve करके
❌ लेकिन उसकी निजी income या personal assets को touch नहीं किया जा सकता
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शायरी में कहें तो —
🎶
नहीं भेज सकते हो नोटिस उसको, जो अब सुन ही नहीं सकता,
कानून की उन उलझनों को, जो अब चुन ही नहीं सकता।
अदालत ने कहा साफ़, कि ये इंसाफ का दस्तूर नहीं,
मरे हुए को मुजरिम कहना, कुदरत को मंज़ूर नहीं।
🎶
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⭐ 𝗟𝗲𝗴𝗮𝗹 𝗥𝗲𝗽𝗿𝗲𝘀𝗲𝗻𝘁𝗮𝘁𝗶𝘃𝗲 कौन?
नाम से नहीं।
रिश्ते से नहीं।
हकीकत से तय होगा —
✅ जिसके पास संपत्ति गई
✅ जिसके हाथ में assets हैं
वही legal representative माना जाएगा।
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⭐ चलते-चलते…
Sole Proprietor के देहांत के बाद क्या करें —
1️⃣ जल्द से जल्द department में Death Certificate जमा करें
2️⃣ अगर business continue कर रहे हैं —
authorised signatory change कराएँ
और ITC-02 से ITC transfer करें
3️⃣ अगर business continue नहीं कर रहे —
department को inform करके GST number surrender करें
4️⃣ Department से communication में
रिश्ता बताइए,
लेकिन “legal representative” शब्द सोच-समझकर लिखिए
5️⃣ अधिकार से asset लेंगे,
तो जिम्मेदारी से demand आने पर payment भी करना होगा
6️⃣ Digital world है —
bank account हो या Sub-Registrar office,
सब connected है
निर्णय सोच-समझकर लें
🎶
जिसके पास विरासत आई है,
वही जवाब देगा।
जिसे कुछ नहीं मिला,
उससे कुछ नहीं माँगा जा सकता।
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✍️ पोस्ट लिखने वाले
𝗖𝗔 𝗩𝗶𝗸𝗮𝘀𝗵 𝗗𝗵𝗮𝗻𝗮𝗻𝗶𝗮 | 𝗚𝗦𝗧 𝗗𝗢𝗦𝗧
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⚠️ डिस्क्लेमर
❗ यह पोस्ट केवल सामान्य जागरूकता हेतु है
❗ समझाने के लिए रचनात्मक शैली अपनाई गई है
❗ केवल इस पोस्ट के आधार पर कोई Tax / Legal निर्णय न लें
❗ हमेशा अपने Consultant / Legal Advisor से सलाह लें
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