06/11/2024
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि विशेष रूप से चेक बाउंसिंग मामलों में अभियुक्तों की उपस्थिति पर आमतौर पर जोर नहीं दिया जाना चाहिए, जब तक कि ट्रायल कोर्ट को अभियुक्तों की जांच करने या उनका बयान दर्ज करने की आवश्यकता न हो। जस्टिस अरुण मोंगा की एकल न्यायाधीश पीठ निगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत चेक अनादर के लिए आरोपी एक व्यक्ति की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। उन्होंने निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनकी जमानत जब्त कर ली गई थी और तारीख पर पेश नहीं होने पर उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। निचली अदालत ने व्यक्ति की जमानत राशि के खिलाफ सीआरपीसी की धारा 446 (मुचलके के जब्त होने की प्रक्रिया) के तहत कार्यवाही भी शुरू की थी।
राजस्थान हाईकोर्ट की जोधपुर पीठ ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि विशेष रूप से चेक बाउंसिंग मामलों में अभियुक्तों क...